साढ़े तीन हजार बेटियों का न ‘श्री’ हुआ न ‘राज’ मिला

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साढ़े तीन हजार बेटियों का न ‘श्री’ हुआ न ‘राज’ मिला

पत्रिका एक्सक्लूसिव-राजश्री योजना : जिले की 3651 बेटियों को नहीं मिली प्रथम व द्वितीय किश्त की राशि

श्रीगंगानगर. राज्य व केंद्र सरकार बेटियों को बढ़ावा देने के लिए बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ व राजश्री योजना जैसी बहुत सी महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित कर रही है, लेकिन श्रीगंगानगर जिले में यहां उल्टा हो रहा है। विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही से राजश्री योजना में पिछले तीन साल से 3651 बेटियों में से किसी को प्रथम तो बहुत सी बेटियों को प्रथम व द्वितीय किस्त की राशि ही नहीं मिली है। योजना में बेटी जन्म से लेकर 12वीं की पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूर्ण करने पर बेटी के खाता में 50 हजार रुपए तक की राशि देने का प्रावधान है। जिले की पीएचसी, सीएचसी, अर्बन डिस्पेंसरी व जिला चिकित्सालय द्वारा एक से लेकर तीन साल तक की 3651 बेटियों को राशि देने का इंतजार करना पड़ा रहा है।

चक्कर लगाने को मजबूर

राजकीय जिला चिकित्सालय में पिछले तीन साल से राजश्री योजना में 451 बेटियों को राशि का भुगतान नहीं किया गया है। इस कारण पात्र लोगों को बार-बार जिला चिकित्सालय में चक्कर लगाना पड़ रहा है।

यह है राजश्री योजना
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राजश्री योजना में बेटी जन्म से लेकर 12वीं कक्षा की पढ़ाई सरकारी स्कूल में पूर्ण करने पर 50 हजार रुपए की राशि का भुगतान ऑनलाइन बेटियों के खातों में करता है। बेटियों को प्रथम व द्वितीय किस्त में क्रमश: ढाई-ढाई हजार रुपए की राशि दी जाती है।

राजश्री योजना का गणित

वर्ष संख्या

2016-17 430

2017-18 789

2018-19 2432

कुल 3651

(श्रीगंगानगर जिले की स्थिति)

राजकीय जिला चिकित्सालय

वर्ष संख्या

2016-17 115

2017-18 116

2018-19 220

कुल 451

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किया है पाबंद

राजश्री योजना में भुगतान करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी, पीएचसी व सीएचसी के समस्त चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी, अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को भुगतान करने के लिए पाबंद किया गया है। इनको इसके लिए 25 जनवरी को अंतिम तिथि दी गई है। साथ ही राज्य स्तर पर भुगतान में देरी हो रही है।

डॉ.गिरधारी लाल मेहरड़ा, सीएमएचओ, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग, श्रीगंगानगर।

Krishan chauhan Reporting
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