तीस बीघा भूमि बेचकर 90 करोड़ कमाएगी यूआईटी

- पुरानी शुगर मिल की भूमि को तीन चरणों में बेचने की योजना

By: vikas meel

Published: 24 May 2018, 10:21 PM IST

- सड़क बनाने के लिए ढाई करोड़ रुपए खर्च करेगा न्यास

श्रीगंगानगर.

आर्थिक संकट से जूझ रहा नगर विकास न्यास अब खजाना अब भरने की तैयारी की जा रही है। पुरानी शुगर मिल की भूमि पर मिनी सचिवालय के अलावा शेष रही बीस बीघा भूमि को नगर विकास न्यास ने बेचकर 90 करोड़ रुपए की कमाई करेगी।

 

भूमि बेचान के दौरान आम आदमी या मध्यम वर्गीय परिवारों को कोई राहत नहीं दी जाएगी, यह सिर्फ कॉलोनाइजर, बड़े घराने या मॉल बनाने वाली कंपनियों के लिए आरक्षित किए गए है। यह भूमि तीन चरणों में बेचने की योजना है। पहले चरण में छह हाउसिंग भूखण्ड, एक मिश्रित भूखण्ड और चार कॉमर्शियल भूखण्डों की बिक्री से करीब 18 करोड़ 50 लाख रुपए राजस्व मिलने की उम्मीद है। इस पहले चरण के लिए भूखण्डों की निलामी 18 और 19 जून को तिथि निर्धारित की है।

 

न्यास प्रशासन ने प्रत्येक भूखण्ड के लिए दस लाख रुपए की धरोहर राशि जमा कराने की योजना भी तैयार की है। भूखण्डों की नीलामी से पहले वहां सड़क बनाने के लिए ढाई करोड़ रुपए का बजट खर्च किया जा रहा है।

 

यह बजट राजस्थान राज्य सड़क डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (आरएसआरडीसी) के माध्यम से खर्च किया जाएगा। न्यास प्रशासन ने राज्य सरकार से अनुमति लेकर आरएसआरडीसी को यह काम दिया है। दूसरे चरण में 53 करोड़ रुपए और तीसरे चरण में करीब पौने 19 करोड़ रुपए की आय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

 

कॉलोनाइजर्स और बड़े घरानों को फायदा

भूखण्डों के साइज इस तरह रखे जा रहे हैं जिससे कॉलोनाइजर और बड़े घराने ही इसे खरीद सकेंगे। न्यास प्रशासन का कहना है कि प्रथम चरण में छह भूखण्ड हाउसिंग इस्तेमाल के लिए रखे गए हैं। प्रत्येक भूखंड 165 गुणा 217 फीट का होगा। इस प्रत्येक भूखण्ड पर निर्माण की ऊंचाई अधिकतम तीस मीटर तय की गई है। इन भूखण्डों में फ्लैट का निर्माण हो सकेगा, एक भूखण्ड में करीब 80 से 100 फ्लैट बनेंगे।


कॉलोनाइजर बना सकेंगे 100 फ्लैट
कॉलोनाइजर न्यास से भूखण्ड खरीद कर प्रत्येक में करीब एक सौ फ्लैट बना सकेंगे। इसी तरह मिश्रित भूखण्ड का साइज 55 गुणा 330 फीट का रखा गया, वहीं कॉमर्शियल भूखण्ड का साइज 122 गुणा 255 फीट तय किया है। कॉमर्शियल इस्तेमाल के इन भूखण्डों में करीब पचास से साठ दुकानों का मॉल बन सकेगा।

 

यह सही है कि बड़े-बड़े भूखण्ड बेचकर यूआईटी को करीब नब्बे करोड़ रुपए का अनुमानित राजस्व मिलेगा। छोटे भूखण्ड बेचने से लंबी प्रक्रिया तय करनी पड़ती है। उम्मीद है कि मिनी सचिवालय के पास इन भूखण्डों को खरीदने के लिए लोगों में दिलचस्पी अधिक रहेगी।
- कैलाशचन्द्र शर्मा, सचिव नगर विकास न्यास

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