Video: स्टोपर से टकराकर डी रेल हुआ थर्मल का इंजन

Sonakshi Jain

Publish: Oct, 12 2017 03:24:41 (IST)

Sri Ganganagar, Rajasthan, India
Video: स्टोपर से टकराकर डी रेल हुआ थर्मल का इंजन

चालक को झपकी आने से हुआ हादसा

सूरतगढ़ थर्मल। सूरतगढ़ सुपर थर्मल परियोजना के कोल हैंडलिंग प्लांट में कोयले का रैक खाली कर रहा परियोजना का रेल इंजन गुरुवार अलसुबह ब्रेक नही लगने के कारण स्टॉपर से टकरा कर डी रेल हो कर मुख्य द्वार से परियोजना के अंदर जाने वाली सड़क के किनारे तक आ गया। मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार सुबह 4 बजे के करीब परियोजना के कोल हैंडलिंग प्लांट में कोयले के वैगन को टिप्लर पर लगा रहे परियोजना के इंजन के ब्रेक नही लगने से इंजन रेलवे ट्रैक के अंतिम छोर पर लगे स्टॉपर से टकरा गया। जिसके कारण रेलवे ट्रेक सहित इंजन क्षतिग्रस्त हो गया। गनीमत रही की इंजन को ज्यादा नुकसान नही हुआ। परियोजना के अभियंताओ एवम थर्मल में काम कर रहे रेलवे विशेषग्यो ने सुबह साढ़े ग्यारह बजे के करीब इंजन को पुनः पटरियों पर स्थापित कर दिया।

 

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हो सकता था बड़ा हादसा-

सुबह 7 बजे से परियोजना की शिफ्ट परिवर्तन के साथ ही मुख्य द्वारा से परियोजना जाने वाली मुख्य सड़क पर आवागमन बढ़ जाता है। इसके अलावा इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन होता ही रहता है। ऐसे में अगर इंजन की गति तेज होती तो इंजन सड़क पर आ जाता ओर कोई वाहन इसकी चपेट में आ सकता था।

 

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पूर्व में भी हो चुका है हादसा

मिली जानकारी के अनुसार परियोजना में आने वाले कोयले की गाड़ियों के वैगन को खाली करने के लिए बने वैगन टिप्लरो तक लेजाने एवम खाली वैगन को हटाने के लिए सूरतगढ़ तापीय परियोजना में 6 पॉवर (रेल इंजन) है। एवम इनको चलबे के लिए परियोजना के पास पर्याप्त लोको पायलेट नही है। इसके कारण अत्यधिक कार्यभार के कारण अक्सर दुर्घटनाये हो जाती है। गत वर्ष 20 दिसम्बर को भी सुबह 8 बजे के करीब थर्मल का इंजन स्टॉपर को तोड़ते हुए मुख्य सड़क पर आ गया था। जिसे घण्टो मशक्कत के बाद पुनः ट्रेक पर लाया जा सका था।

 

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नींद की झपकी के कारण हुआ हादसा

सूरतगढ़ तापीय परियोजना के सभी छह इंजनों को चलाने के लिए सभी शिफ्टों में 16 लोको पायलेट की आवशयकता होती है। जबकि सूरतगढ़ तापीय परियोजना में फिलहाल मात्र 7 रेलवे से सेवा निवृत्त लोको पायलेट ही थर्मल में कार्यरत है। बुधवार रात्रि को आई चार कोयले की गाड़ियों के वैगन को टिप्लर तक ले जाने एवम खाली वैगन को हटाने के लिए तीन लोको पायलेट की आवश्यकता थी लेकिन मात्र दो ही लोको पायलेट ड्यूटी पर थे। परियोजना में चल रही कोयले की कमी एवम लगातार कार्य करने से इंजन चालक को नींद की झपकी आ गई जिससे ये हादसा हो गया।

 

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उच्चस्तरीय जांच की मांग

सूरतगढ़ विद्युत उत्पादन मजदूर यूनियन इंटक के अध्यक्ष श्याम सूंदर शर्मा ने घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है की कोल हैंडलिंग प्लांट के अधिकारियो की लापरवाही और बदइंतजामी के कारण आये दिन दुर्घटनाये होती रहती है।उन्होंने पर्याप्त लोको पायलेट नियुक्त करने की मांग की है। उन्होंने गुरुवार को हुई घटना की जाँच बाहरी एजेंसी से करवाने की मांग की है। विभागीय पक्ष लोको पायलेट को झपकी आने से इंजन की हल्की सी टक्कर स्टोपर से हो गई थी। जूझे सुबह 11 बजे के करीब पुनः पटरियों पर स्थापित कर ऑपरेशन में ले लिया है। परियोजना के इंजनों को चलाने हेतु सेवानिवृत लोको पायलेट नियुक्त किये जाते है। जभी पर्याप्त उनकी पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। इंजन ओर कोयले से भरे वैगन सही सलामत है।

 

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