scriptWe see dreams in the quilt, the sense of national defense in their eye | हम रजाई में देखते सपने, कोहरे को भेदती उनकी आंखों में राष्ट्र रक्षा का भाव | Patrika News

हम रजाई में देखते सपने, कोहरे को भेदती उनकी आंखों में राष्ट्र रक्षा का भाव

We see dreams in the quilt, the sense of national defense in their eyes piercing the fog-कोहरे में लिपटी सर्द रातों में सीमा सुरक्षा बल के जवान सजगता से करते हैं सीमा की रक्षा

श्री गंगानगर

Published: January 15, 2022 08:16:17 pm

मंगेश कौशिक

श्रीगंगानगर. कोहरा इतना घना कि आंखों से दस-बीस फीट दूर कुछ दिखाई नहीं दे। तापमान भी इतना कम की शरीर ठंड से अकडऩे लगे। ऐसे में सीमा सुरक्षा बल का जवान रात के सन्नाटे में बॉर्डर पर अपने कर्तव्य को अंजाम दे रहा होता है तो उसके जज्बे को सलाम तो बनता ही है।
हम रजाई में देखते सपने, कोहरे को भेदती उनकी आंखों में राष्ट्र रक्षा का भाव
हम रजाई में देखते सपने, कोहरे को भेदती उनकी आंखों में राष्ट्र रक्षा का भाव
ड्यूटी तो ड्यूटी होती है। लेकिन सीमा सुरक्षा बल के जवानों की ड्यूटी आसान नहीं। विपरीत मौसम और परिस्थितियों में जिस सजगता से जवान अपनी ड्यूटी को अंजाम देते हैं, उसी की बदौलत हमारी सीमा सुरक्षित है और हम चैन की नींद सोते हैं।
पहले मावठ की बारिश और अब कोहरा। मौसम की इन दोनों परिस्थितियों में रात के समय खुले आसमान के नीचे लगातार छह घंटे खड़े-खड़े बॉर्डर की चौकसी करना आसान नहीं। वह भी तब जब आसपास कोई नहीं हो।
ऐसे में सहारा बनते हैं वर्दी में शामिल गर्म कपड़े जो तन को गर्मी देते हैं और मेक इन इंडिया की पहचान बनी इंसास राइफल जो दुश्मन को ढेर करने की ताकत हाथों को देती है।
कोहरे में लिपटी रात 'पत्रिकाÓ टीम ने क्यू हैड सीमा चौकी पर जवानों के साथ कुछ घंटे बिताए तो पता चला कि कमरे की चारदीवारी में रजाई में दुबक कर रात काटने और सुनसान बॉर्डर पर आसमान के नीचे केवल वर्दी पहन कर रात बिताने में कितना अंतर है।
राजस्थान फ्रंटियर में श्रीगंगानगर सेक्टर ही ऐसा है जहां सर्दी के मौसम में जवानों को हाड़ कंपाने वाली ठंड के साथ कोहरे का सामना करते हुए सीमा की सुरक्षा करनी होती है। अभी मावठ हुई तो जवानों को रातभर भीगते हुए सीमा की चौकसी करनी पड़ी।
मावठ के बाद कोहरे का पगफेरा हुआ है। यह भी हल्की बारिश की तरह बरसता है। बचाव के लिए जवान रेन कोट का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन रात की ड्यूटी पर जाते समय कोहरा नहीं हो और रेन कोट साथ नहीं लिया तो आधी रात को या अल सुबह को कोहरा आने पर वर्दी पूरी तरह भीग जाती है।
गर्माहट या वर्दी को सुखाने के लिए जवान अलाव इसलिए नहीं जला सकते कि इसका फायदा सीमा पार घात लगाए बैठे राष्ट्रविरोधी तत्व या फिर नशे के तस्कर उठा सकते हैं।

रात के समय सीमा पार राष्ट्रविरोधी तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए नाइट विजन, नाइट गॉगल और थर्मल इमेजर जैसे उपकरण सीमा सुरक्षा बल को उपलब्ध करवाए गए हैं।
लेकिन कोहरे में यह उपकरण काम नहीं करते। ऐसे मौसम में थर्मल इमेजर से भी सीमा पार राष्ट्रविरोधी तत्वों की गतिविधियों की टोह नहीं ले पा रहे। इस उपकरण पर कपड़ा आदि डालकर इमेज लेने की कोशिश बल के जवान करते हैं तो बहुत कम दूरी की इमेज ही बन पाती है।
थर्मल इमेजर शरीर से निकलने वाली गर्मी से इमेज बनाता है। सामान्य मौसम में इसकी रेंज तीन किलोमीटर तक होती है। सीमा पार इतनी दूरी पर होने वाली हलचल को यह उपकरण पकड़ कर उसकी इमेज बनाने में सक्षम है।
रात के समय जिन जवानों की ड्यूटी बॉर्डर पर होती है उनके लिए चाय ही एकमात्र राहत देने का सहारा है। कम्पनी कमाण्डर ने बताया कि रात में सीमा चौकी से जवानों के लिए तीन बार चाय जाती है।
कई बार चार दौर भी हो जाते हैं। चाय के साथ बिस्किट भी दिए जाते हैं। पीने के लिए गर्म पानी की बोतल जवान ड्यूटी पर जाते समय साथ ले जाते हैं।

रात्रि ड्यूटी पूरी होने के बाद जवान सीमा चौकी पर लौटते हैं तो उन्हें नहाने के लिए गर्म पानी तैयार मिलता है। सर्दी-जुखाम से बचाव के लिए दवाइयां भी सीमा चौकी पर उपलब्ध रहती है।
अंतरराष्ट्रीय सीमा की चौकसी के लिए भारत ने तारबंदी करवाई और फ्लड लाइट लगाई। राष्ट्रविरोधी तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए राजस्थान से सटी 1040 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल की कई बटालियन तैनात हैं जिनके हजारों जवान रात-दिन सीमा की चौकसी करते हैं।
सीमा के उस पार ऐसा नहीं है। श्रीगंगानगर सेक्टर में क्यू हैड सीमा चौकी के ठीक सामने पाक रेंजर्स की मुस्लिम शहीद सीमा चौकी है, जहां शाम होते ही सन्नाटा पसर जाता है।

हमारी तरफ सीमा चौकी पर बिजली की रोशनी होती है, उधर घुप्प अंधेरा। उनकी सीमा चौकी के पीछे पाकिस्तान का डोंगरिया गांव है। वहां भी रात के समय बिजली की रोशनी नहीं दिखती जबकि इधर भारतीय सीमा में बॉर्डर के गांवों में रात भर बिजली की रोशनी दिखाई देती है। ग्राम पंचायतों ने अब विद्युत पोलों पर रोशनी की व्यवस्था कर दी है।

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