रेशा की गुणवत्ता में ‘सफेद सोना’ बेहतर

-राजस्थान की अस्सी प्रतिशत कॉटन का उत्पादन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में
-दोनों जिले में चार लाख 59 हजार 44 हेक्टेयर में कपास की फसल

By: Krishan chauhan

Published: 21 Nov 2020, 10:21 AM IST

रेशा की गुणवत्ता में ‘सफेद सोना’ बेहतर

-राजस्थान की अस्सी प्रतिशत कॉटन का उत्पादन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में
-दोनों जिले में चार लाख 59 हजार 44 हेक्टेयर में कपास की फसल

पत्रिका एक्सक्लूसिव-कृष्ण चौहान
श्रीगंगानगर. कृषि उत्पाद में सिरमौर श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले की कपास से तैयार धागे की विदेशों में अच्छी मांग है। उत्तरी राजस्थान में पैदा होने वाली कपास के रेशा की गुणवत्ता बेहतर है। इस कपास से तैयार धागे की विश्व बाजार में अच्छी मांग बनी हुई है। कपास पट्टी के नाम से विख्यात श्रीगंगानगर जिले की सफेद सोना की गुणवत्ता 27 एमएम लंबाई के रेशा से प्लस में है। दोनों जिलों में चार लाख 59 हजार 44 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कपास का एरिया है। इस बार कपास की गुणवत्ता व उत्पादकता अच्छी है। कृषि वैज्ञानिक, भारतीय कपास निगम तथा कपास व्यापारियों के अनुसार इस बार अमरीकन कपास (नरमा) की गुणवत्ता पंजाब-हरियाणा की तरह बेहतर है। इस क्षेत्र में नई किस्मों का आने और हाईब्रिड किस्सों की बुवाई से रेशा की गुणवत्ता में पिछले कुछ वर्षों की तुलना में सुधार हुआ है।

80 प्रतिशत कपास का उत्पादन
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राजस्थान में अस्सी प्रतिशत कपास का उत्पादन श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में होती है। जबकि बीस प्रतिशत कपास जोधपुर, अलवर, भीलवाड़ा, नागौर, पाली व सिरोह जिले में होती है।

तीन भागों में बांटा कपास उत्पादक क्षेत्र को
देश के कपास उत्पादक क्षेत्र को तीन भागों में बांटा हुआ है। इनमें दक्षिण में आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु व कर्नाटक, मध्य क्षेत्र में महाराष्ट्र, गुजरात व मध्यप्रदेश और उत्तरी क्षेत्र में पंजाब-हरियाणा व राजस्थान आता है। हालांकि सबसे अच्छी गुणवत्ता की कपास मध्य क्षेत्र की मानी जाती है। इसके बाद दक्षिण व उत्तर क्षेत्र का नंबर आता है। महाराष्ट्र व गुजरात में लंबे रेशे वाली कपास 30 एमएम की होती है। जबकि उत्तरी भारत में होने वाली कपास में राजस्थान आता है।

अच्छी किस्म, अनुकूल मौसम से बढ़ी गुणवत्ता
कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर के वरिष्ठ कपास प्रजनक वैज्ञानिक डॉ.आचार्य ने बताया कि यहां पर कुछ ऐसी किस्में भी है जो गुणवत्ता की दृष्टि से काफी बेहतर है। वर्तमान में यहां के कपास के रेशे की लंबाई अनुकुल मौसम रहने पर 27 एमएम, ताकत (धागे की मजबूती) 28 से 29 ग्राम प्रति टेक्स, फ ाइनेस (मुलायमता) 4.3 से 4.4 माइक्रोवेल्यू तथा फायन (चिकनापन) सोर्ट फायवर कन्टेंट चालीस प्रतिशत तक रहता है।

कपास की लंबाई की श्रेणी

श्रेणी लंबाई
छोटे रेशा 20 से कम

मध्यम रेशा 20.5 से 25.5
मध्यम लंबाई रेशा 26 से 27.5

लंबे रेशा 28 से 33.5
ज्यादा लंबे रेशा 34.0 व इससे अधिक

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श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ जिले में कॉटन की गुणवत्ता पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अच्छी है। यहां की कपास की एमएसपी पर खरीद की जा रही है। वर्तमान में कॉटन की खरीद 27 एमएम रेशा की जा रही है।
-नीरज भ_, एजीएम, भारतीय कपास निगम लिमिटेड, श्रीगंगानगर।

कपास का उत्पादन व गुणवत्ता अच्छी है। इस कारण किसान को कपास का एमएसपी पर भाव अच्छा मिल रहा है लेकिन यंत्रीकरण नहीं होने से किसान को कपास की चुगाई में काफी परेशानी आती है।

-आदित्य चितलांगिया, डायरेक्टर, नॉर्दन इंडिया कॉटन एसोसिएशन।

यहां की कपास गुणवत्ता के दृष्टिकोण से बेहतर है। इस बार कपास का रेशा 27 एमएम से अधिक रहा है। यहां पर आरएस 27 व 28, आरएस-18 वैरायटी की कपास की गुणवत्ता बेहतर है।
डॉ.विजय प्रकाश आचार्य, वरिष्ठ कपास प्रजनक वैज्ञानिक, कृषि अनुसंधान केंद्र श्रीगंगानगर

Krishan chauhan Reporting
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