मकान से निकाली गई महिला व बच्चे फिर धरने पर बैठे, सडक़ पर मनाई राखी

कमरे से फेंके गए सामान की भरपाई की मांग

By: Raj Singh

Published: 03 Aug 2020, 10:30 PM IST

श्रीगंगानगर. पुरानी आबादी टावर के समीप किराए पर कमरे का किराया नहीं भर पाने को लेकर निकाली गई महिला व उसके बच्चे सोमवार को फिर से कलक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गए। पीडि़त महिला ने सडक़ पर फेंके गए सामान के नुकसान की भरपाई कराए जाने की मांग की है। महिला ने कहा कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलता है, तब वह दिन-रात यहां धरना देगी।


अलीगढ़ की सुमित्रादेवी यहां अपनी एक बेटी व बेटे के साथ निवास करती आ रही थी। महिला एक निजी कॉलेज में गार्ड थी लेकिन कोरोना के चलते वहां से भी हटा दिया गया। इसके बाद वह लोगों के कपड़े प्रेस करके अपना गुजारा करती थी। धीरे-धीरे कपड़े भी बंद हो गए। इसके चलते एक माह का मकान किराया नहीं दे पाई। इस पर मकान मालिक ने उसको बच्चों सहित घर से निकाल दिया और सामान सडक़ पर पट दिया। 25 जुलाई के बाद महिला इधर-उधर भटकती रही और लोग उसको खाने-पीने की व्यवस्था करते रहे। वह रैन बसेरे में भी गई, जहां से उसे भेज दिया गया। रविवार को वह अपने दोनों बच्चों के साथ कलक्ट्रेट के बाहर धरने पर बैठ गई।

महिला व बच्चों के साथ अन्य लोग भी धरने पर बैठ गए। पूर्व पार्षद डॉ. भरत मय्यर व अन्य लोगों ने नगरपरिषद अधिकारियों से बात कर महिला व बच्चों को रैन बसेरे में भेजा था। पीडि़ता की मांग है कि घर से बाहर फेंके सामान का काफी नुकसान हुआ है। ऐसे में उसके नुकसान की भरपाई कराई जाए। इस मांग को लेकर वह सुबह फिर से कलक्ट्रेट के सामने अपने दोनों बच्चों के साथ धरने पर बैठ गई। यह देखकर वहां लोगों ने उसकी मदद की।

महिला की बेटी ने सडक़ पर ही अपने भाई को राखी बांधी। यहां लोगों ने परिवार के लिए भोजन आदि की व्यवस्था की। रात आठ बजे के बाद भी महिला अपने दोनों बच्चों के साथ सडक़ पर ही बैठी थी। उसकी मदद को एक वृद्धा वहां पहुंची है।

Raj Singh Reporting
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