महिलाओं ने दिखाया उत्साह, खनके डांडिया

Women showed enthusiasm, danced dandiya- नवरात्र पर अष्टमी की धूम: घरों से लेकर मंदिरों तक गूंजे महामाई के जयकारे

By: surender ojha

Updated: 13 Oct 2021, 10:54 PM IST

श्रीगंगानगर. शारदीय नवरात्रों में अष्टमी पर बुधवार को सुबह से लेकर देर रात तक मां दुर्गा को रिझाने के लिए देवी भक्तों ने घरों से लेकर मंदिरों तक जयकारे लगाए। वहीं शाम को मंदिरों में महाआरती के दौरान श्रद्धालू साक्षी बने। कई मोहल्लों में महिलाओं ने मां भगवती को रिझाने के लिए डांडिया और गरबा डांस का आयोजन किया।

जिला मुख्यालय पर वार्ड 48 के जवाहरनगर के सेक्टर 5 में स्थित अशोक वाटिका में महिलाओं की ओर से आयोजित डांडिया उत्सव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में महिलाएं रंग बिरंगी ड्रेस पहनकर और सज धज कर आई। महिलाओं ने डांडिया के माध्यम से मां भगवती को रिझाया।

पार्षद ओम प्रकाश मित्तल की ओर से महिलाओं को पुरुस्कृत भी किया। इस मौके पर चित्रा बंसल, अनूप गर्ग, श्वेता गुप्ता, चारू गर्ग, संतोष मित्त्ल, नीरू मित्तल आदि महिलाओं का विशेष सहयोग रहा।

व्यापारी मनीष गर्ग ने बताया कि कोरोना काल के लंबे समय के बाद एक ही मंच पर महिलाओं ने डांडिया और गरबे के माध्यम से त्यौहार को मनाया।
इससे पहले सुबह उठते ही घट स्थापना स्थल पर पूजा अर्चना का दौर शुरू हो गया। इसके बाद कंजकों की पूजा की गई और प्रसाद वितरण के उपरांत अपने इच्छानुसार गिफ्ट भी बांटे। अष्टमी के दिन मां के उन भक्तों ने उपवास खोला जो पिछले आठ दिनों से तपस्या में लीन रहे।

एेसे भक्तों ने घरों और मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना की। बुधवार शाम को अधिकांश मंदिरों में मां दुर्गा सहित देवी देवताओं की महाआरती कर रिझाया गया।

मुखर्जीनगर स्थित दुर्गा मंदिर में महाआरती में आसपास बसे लोगों के अलावा शहर के अन्य इलाकों से भी श्रद्धालुओ ने वहां जाकर धोक लगाई। कई परिवारों ने पल्लू और मेड़ता रोड़ स्थित ब्राह्मणी मंदिर में जाकर मां ब्राह्मणी की धोक लगाई तो कई परिवारों ने ज्वालामुखी, वेष्णों देवी जाकर देवी के दर्शन किए। जिला मुख्यालय पर अधिकांश मंदिरों में देवियों का गुणगान किया गया।

दुर्गा अष्टमी पर्व पर कंजकों की पूजा भक्तों के लिए जरूरी है। लेकिन कई मोहल्लों में कन्याओं की कमी खली। इस कारण लोगों ने अपने परिचितों के माध्यम से कंजकों को अपने घरों में बुलाने की मदद मांगी। मंदिरों में सुबह से ही कंजकों में उत्साह देखने को मिला। इन कंजकों को उपहार देने की हौड़ लगी रही।

अधिकांश घरों में पूरी, हलवा, खीर, भुने चने तैयार प्रसाद बनाने का दौर भी शुरू हुआ। कंजकों भोजन से पहले कन्याओं के पैर धोकर उनसे आशीर्वाद लिया गया ताकि घर में सुख समृद्धि बनी रही।

surender ojha Reporting
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