निर्भया कांड से भी नहीं चेती पुलिस, 2 महिला पुलिसकर्मियों के भरोसे रेप-छेड़छाड़ के 50 केस

साल 2012 में दिल्ली में हुए दिल दहला देने वाले निर्भया कांड ने पूरे देश को भले ही झकझोर के रख दिया हो, लेकिन दिल्ली पुलिस ने अब तक इससे सबक नहीं लिया है।

साल 2012 में दिल्ली में हुए दिल दहला देने वाले निर्भया कांड ने पूरे देश को भले ही झकझोर के रख दिया हो, लेकिन पुलिस ने अब तक इससे सबक नहीं लिया है। निर्भया कांड के बाद गठित पैनल द्वारा पुलिस थानों में स्टाफ बढ़ाने (खासकर महिला अधिकारियों की संख्या) के लिए कई सिफारिशें की गई है, अनंतः नतीजा सिफर ही रहा है।

निर्भया गैंगरेप केस में जिस वसंत विहार पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी वहां भी कुछ नहीं बदला, अगर  बढ़ा भी तो सिर्फ महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध। वसंत विहार पुलिस थाने में जहां 2014 में महिला उत्पीड़न के 17 मामले दर्ज थे वहीं 2015 में अप्रैल माह तक 50 केस दर्ज हो चुके हैं। रेप की घटनाएं 9 से बढ़कर 15 हो गई है।

हैरानी वाली बात यह है कि वसंत विहार थाने में रेप और जघन्य अपराधों से संबंधित केसों की जांच के लिए सिर्फ दो महिला सब-इंसपेक्टर है। अन्य केसों जैसे- उत्पीड़न, शोषण आदि की जांच पुरुष पुलिसकर्मी करते हैं।

हाल ही में दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने चार विशेष अपराधों के लिए बलात्कार, छेड़छाड़, चेन स्नैचिंग और हत्या को सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में मैप किया था।
   
इन आंकड़ों को देखने से ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस महिलाओं के खिलाफ हो रही घटनाओं को लेकर गंभीर नहीं हैं।
 

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