अंधभक्ति VS कानून की सख्ती...

अंधभक्ति VS कानून की सख्ती...

Punit Kumar | Publish: Aug, 26 2017 12:00:00 AM (IST) राज्य

देश के विवादित धर्मगुरुओं की फेहरिस्त में कई नाम है। एक दौर में सभी ने लोकप्रियता का ऐसा चरम हासिल किया कि पूजे जाने लगे।

विशाल सूर्यकांत


अंधभक्ति और कानून की सख्ती....इन दो शब्दों के बीच कानून-व्यवस्था के बूरे दौर से गुजर रहे हैं हरियाणा और पंजाब....और उसके साथ ही राजस्थान और दिल्ली भी। मुद्दा है राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हुई हिंसा का...हिंसक आंदोलन की आंच कई राज्यों तक फैल चुकी है। एक और कोर्ट का फैसला है तो दूसरी ओर अंधभक्ति की इंतहा ...। सीबीआई कोर्ट ने 15 साल पुराने मामले में एक धर्मगुरु को दोषी करार दिया और समर्थक इस कदर हिंसक हो गए कि अब तक 28 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बरें सामने आ रही है और ये आंकडा बढ़ भी सकता है,सैंकडों लोग घायल हैं। भारी पैमाने पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। हिंसा फैला रहे एक हजार से ज्यादा डेरा समर्थकों को हिरासत में लिया गया है। मगर सबसे अहम पहलू ये कि ना सड़क पर,ना पूर्वानुमान में और ना ही इरादों में,कहीं सरकारें नजर आ रही है।

 

 

पंजाब,हरियाणा में पूर्ण बहुमत से चुनी गई सरकारें घुटने टेके हुई नजर आ रही है। फैसला आने से पहले ही पुलिस,प्रशासन इस कदर नाकारा साबित हुआ कि लाखों समर्थक एक-एक कर करीब पांच लाख की तादाद में जुट गए और सरकार आंखे मूंदे बैठे रही। सरकार को बैकफुट पर आता देख हाईकोर्ट सक्रिय हुआ और कानून-व्यवस्था की सारी कमान अपनी मॉनिटरिंग में ले ली। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आज दिए दूसरे बड़े निर्देश में डेरे की संपत्ति जब्त कर नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए हैं।

 

 

इसे सरकारों की नाकामी क्यों ना मानी जाए जब हाईकोर्ट चेता रहा था, जब धारा 144 लागू होने का असर नहीं दिख रहा था, जब रामपाल और जाट आंदोलन की हिंसक घटनाएं सामने थी, जब 800 गाड़ियों के काफिले में राम रहीम कोर्ट पहुंच थे...ये तमाम परिस्थितियां कुछ संकेत दे रही थी। शुक्रवार को हुई भयावह हिंसा से कई सवाल उठे हैं। मसलन, दोषी बाबा पर इतना बवाल क्यों ? ये अंधभक्ति है या कानून से ऊपर होने का गुमान ? क्या सरकारें सख्त फैसलों से डरती है ? क्या धर्म और राजनीति के मेल का नतीजा है ? .क्यों सरकारें बैकफुट आई, क्यों हाईकोर्ट को आगे आना पड़ा ? देश को कैसे गुरु-चेले चाहिए उपदेशक,सुधारक या हिंसक?

केस का फैसला बाबा के लिए आया। मगर, आफत जनता के सिर आई। राम रहीम के समर्थन में जुटे लाखों भक्त जुटे और सुरक्षा चाक-चौबंद करने के लिेए किस रूप में व्यवस्था करनी पड़ी उसे समझिए कि स्टेडियम खाली करवाया गया। पंचकुला में सीबीआई कोर्ट को जाने वाले रास्तों की बैरिकेटिंग करवाई गई। लेकिन इसके बावजूद पास में कई सरकारी दफ्तरों के सामने डेरा समर्थकों का हुजूम जमा होने लगा।

 

 

सरकार फिर भी नहीं चेती और हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस ने केंद्र को आदेश दिया कि तुरंत सख्त कदम उठाएं। पंचकुला में हजारों डेरा समर्थकों के पहुंचने पर हरियाणा पुलिस को फटकार लगाई। स्थिति को काबू में रखने के लिए 72 घंटों के लिए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ में इंटरनेट बंद रखा गया है। इसके बावजूद हिंसा का ये घटनाक्रम चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया।

 

- देखिए इस वीडियो में हिंसा को लेकर किस रूप में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस

डेरा और बाबा राम रहीम से जुड़े विवादों की लिस्ट पर ज़रा ग़ौर कीजिए -
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साल 2001 - साध्वी के साथ यौन शोषण का मामला

साल 2002 - पत्रकार रामचंद्र की हत्या का आरोप

साल 2003 - डेरा की प्रबंधन समिति के सदस्य रणजीत सिंह हत्याकांड

साल 2007 - गुरु गोबिंद सिंह के लिबास पर सिखों से विवाद

साल 2010 - डेरा के पूर्व मैनेजर फकीर चंद की गुमशुदगी की मामला

साल 2012 - डेरे के 400 साधुओं को नपुंसक बनाने का आरोप

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पढ़िए वो मामला जिसमें बाबा गुरमीत राम रहीम पर लगे थे आरोप-
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.पंचकुला में सीबीआई की विशेष अदालत ने दिया फैसला

बलात्कार के मामले में बाबा दोषी करार

डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम के खिलाफ साध्वी यौन शोषण समेत दो हत्या के केस चल रहे हैं

एक गुमनाम पत्र के जरिये साध्वी ने डेरा प्रमुख पर यौन शोषण सहित कई संगीन आरोप लगाए थे

हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सितंबर 2002 में सीबीआई जांच के आदेश दिए

सीबीआई ने 31 जुलाई 2007 को आरोप पत्र दाखिल किया

डेरा प्रमुख को अदालत से जमानत तो मिल गई,लेकिन केस सीबीआई अदालत में चला

आज फैसले में अदालत ने दोषी करार दिया.सोमवार को सजा सुनाएगी अदालत

ऐसा है बाबा का रसूख़-


बाबा गुरमीत राम रहीम के रसूख को इस रूप में समझिए कि 700 एकड में उनका आश्रम फैला है। 23 की उम्र में बने डेरा प्रमुख राम रहीम के करोड़ो भक्त होने का दावा किया जाता है। 15 अगस्त, 1967 को राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गुरुसर मोदिया में जाट सिख परिवार में जन्म हुआ और 23 सितंबर, 1990 को शाह सतनाम सिंह में गुरमीत राम रहीम सिंह को अपना वारिस बनाया।

 

 

डेरा सच्चा सौदा का सर न सिर्फ पंजाब और हरियाणा बल्कि विदेशों में भी फैला है। बाबा गुरमीत राम रहीम लग्जरी गाडियों के काफिले में चलते हैं। काले शीशे और काले रंग की एक जैसी गाड़ियों का एक काफिला बाबा के साथ चलता है। वे जब भी कहीं रुकते हैं तो उनकी गाड़ियों को टैंट से ढंक दिया जाता है। बाबा गुरमीत राम रहीम दावा कर चुके हैं कि उन्होंने विराट कोहली को गुरुमंत्र दिया,जिसके बाद उनका बल्ला चल निकला। बाबा का दावा है कि विराट के साथ शिखर धवन,आशीष नेहरा,जहीर खान,यूसुफ पठान ने भी टिप्स लिए हैं। आखिर कोई कैसे आम इंसान से बन जाता है गॉड मैन, देखिए डिबेट के इस हिस्से में, जहां समाजशास्त्री डॉ.प्रज्ञा शर्मा और मनोवैज्ञानी डॉ. पारूल पारीक बता रही हैं कि बाबा और समर्थकों का मनोविज्ञान और समाजशास्तर के लिहाज से उनके चरित्र का विश्लेषण...

 

- देखिए एक सार्थक बहस के निष्कर्ष इस वीडियो में...गुरू बनाम गुरु घंटाल...

देश के विवादित धर्मगुरुओं की फेहरिस्त में कई नाम है। एक दौर में सभी ने लोकप्रियता का ऐसा चरम हासिल किया कि पूजे जाने लगे लेकिन फिर किरदार में ऐेसे नए आयाम सामने आए कि आज कई विवादों से घिरे हैं, कई जेल में विचाराधीन मामलों में फंस चुके हैं और कई तो आरोप सिद्ध होने के बाद जेल में सजायाफ्ता जीवन जी रहे हैं।

 

संत आसाराम
राधे मां
निर्मल बाबा
स्वामी नित्यानंद
संत स्वामी भीमानंद
चन्द्रास्वामी
बाबा रामपाल
स्वामी परमानंद
स्वामी ज्ञान चैतन्य
स्वामी सदाचारी
ज़ाकिर नाईक

 

 

दरअसल , इस देश में धर्मगुरुओं की एक विरासत सदियों से चली आई है...लेकिन मौजूदा दौर में, प्राचीन धर्मगुरूओं जैसा भेष और आधुनिक परिवेश ऐसा घालमेल दिखता है कि आप कन्फ्यूज हो जाएंगे कि ये संन्यासी हैं या अद्भुत गृहस्थ जीवन ...। तन पर कपड़ों लेकर लग्जरी गाडियां तक,आम भक्त से लेकर वीआईपी भक्त तक, जो डेरों में बैठते हैं लेकिन कई राज्यों की राजनीति को प्रभावित करने का रसूख रखते हैं...जो दरबार लगाते हैं और राजनीति पार्टियों के नेताओं को समर्थन के लिए हर चुनाव में अपनी शरण में बुलाते हैं...आलीशान आश्रम,हेरारकी सिस्टम से जुड़े चेले-चपाटे और शान-ओ-शौकत भरी जिंदगी...ये आजकल के धर्मगुरुओं की पहचान बन रही है। याद रखें कि ये कहते हुए हम कतई सभी साधू-संत और महात्माओं पर टिप्पणी नहीं कर रहे...बहुत से सदाचारी और सच्चे धर्मगुरु हैं जिनसे आस्थाएं जु़डती है।

 

 

लेकिन इन आदर्श स्थितियों के बीच ऐसे लोग पनप रहे हैं जो आस्थाओं का शोषण करने वाले बन बैठे है। हरियाणा में जो हुआ वो क्या रोका नहीं जा सकता था, कैसे कोई धर्मगुरु राज्य से ज्यादा ताकतवर हो सकता है ? अकूत संपत्ति और सैंकड़ों एकड के आश्रमों कैसी संस्कृति पनप रही है, इस पर सरकारों की, जांच एजेंसियों की नजर क्यों नहीं पड़ी। वोट बैंक की राजनीति ने राजनीतिक सरकारों को कभी ऐसा करने का साहस नहीं दिया। मगर,देश को विश्वगुरु बनाने के लिए हमें देश के भीतर कैसी गुरु और चेला संस्कृति पनपानी है ये तय करना होगा।

 

 

हाईकोर्ट ने जिस रूप में इस मामले में अपनी भूमिका निभाई है वो वाकई तारीफ-ए-काबिल है। क्योंकि अगर हाईकोर्ट से वक्त पर एक्शन से हिंसा पर काफी हद तक लगाम लगी, संपत्ति जब्त करने के निर्देश हिंसक आंदोलनकारियों के हौंसले जरूर पस्त करेगा। सोमवार को जब फैसला सुनाया जाएगा, हरियाणा,पंजाब,राजस्थान,दिल्ली जैसे राज्यों में एक बार सरकारों को कानून-व्यवस्था की अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा। ये स्थिति वाकई चिंताजनक है।

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