बहुत चमत्कारी होती है होली की रात, ये आसान उपाय चमका सकते हैं किसी की भी किस्मत

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बहुत चमत्कारी होती है होली की रात, ये आसान उपाय चमका सकते हैं किसी की भी किस्मत

कमलगट्टा, बेलफल, सुपारी व पंचमेवा से ऊं ह्रीं श्रीं दारिद्र्यनाशिन्यै नारायणप्रियवल्लभायै भगवत्यै महालक्ष्यै स्वाहा इस मंत्र से 108 आहुतियों का हवन करना चाहिए।

पुराणों व धर्मग्रंथों का मत है कि होली की रात्रि अत्यंत फलदायी होती है। इस रात्रि में किए गए जप, दान व अनुष्ठान कई गुना ज्यादा लाभ देते हैं। अत: इच्छित कार्य की सिद्धि के लिए व्यक्ति को रात्रि के प्रारंभ में अर्थात प्रदोष काल में घी का दीपक मंदिर, तुलसीजी के पास प्रज्वलित करना चाहिए। 



सायंकाल से लेकर मध्यरात्रि तक या भद्र रहने तक वैदिक ब्राह्मणों से पुरुषसूक्त, श्रीसूक्त, लक्ष्मीस्तव व  आचार्य वेदांतदेशिक द्वारा विरचित कनकधारास्तोत्र के पाठ करवाने चाहिए। 



कमलगट्टा, बेलफल, सुपारी व पंचमेवा से ऊं ह्रीं श्रीं दारिद्र्यनाशिन्यै नारायणप्रियवल्लभायै भगवत्यै महालक्ष्यै स्वाहा  इस मंत्र से 108 आहुतियों का हवन करना चाहिए। 




दूसरे दिन प्रात:काल होने ब्राह्मणों को घी-शक्कर मिश्रित खीर का भोजन कराकर वस्त्रादि व दक्षिणा और हवन सामग्री का दान करना चाहिए। रात्रि में इस मंत्र का 1008 बार जप करना भी श्रेयस्कर है-




ऊं नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।

शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि! नमोऽस्तु ते।।




इसके अतिरिक्त 'श्रीदुर्गासप्तशती' का पाठ रात्रि में करना सबसे ज्यादा लाभकारी माना गया है। 




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