9 मार्च को इन कार्यों के हैं शुभ मुहूर्त, जानिए आज के श्रेष्ठ योग

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9 मार्च को इन कार्यों के हैं शुभ मुहूर्त, जानिए आज के श्रेष्ठ योग

गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी।

आज गुरुवार, 9 मार्च 2017 है। शुभ विक्रम संवत् : 2073, संवत्सर का नाम : सौम्य, शाके संवत् : 1938, हिजरी सन् : 1438, अयन : उत्तरायण, ऋतु : बसन्त, मास : फाल्गुन, पक्ष - शुक्ल है।




तिथि 

द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि रात्रि 9.40 तक, तदन्तर त्रयोदशी जया संज्ञक तिथि रहेगी। द्वादशी तिथि में सभी चर-स्थिर कार्य, विवाहादि मांगलिक कार्य और जनेऊ आदि शुभ कहे गए हैं। पर तेल लगाना व यात्रा वर्जित है। 




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त्रयोदशी तिथि में जनेऊ को छोड़कर यात्रा, प्रवेश, वास्तु व वस्त्रालंकार आदि विषयक कार्य शुभ व सिद्ध होते हैं। 



नक्षत्र

पुष्य नक्षत्र सायं 5.12 तक, इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र रहेगा। पुष्य नक्षत्र क्षिप्र संज्ञक नक्षत्र है। जिसमें सभी चर-स्थिर, शांति, पुष्टता, उत्सवादि विवाह को छोड़कर करने चाहिए। अश्लेषा गंडान्त मूल संज्ञक नक्षत्र भी है। अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे जातकों के संभावित अरिष्ट निवारण की दृष्टि से 27 दिन बाद जब अश्लेषा नक्षत्र की पुनरावृत्ति हो, उस दिन नक्षत्र शांति करा देना हितकर रहेगा।




योग

शोभन नामक नैसर्गिक शुभ योग प्रात: 8.59 तक, इसके बाद अतिगंड नामक नैसर्गिक अशुभ योग है। अतिगंड नामक योग की प्रथम छह घटी शुभ कार्यों में त्याज्य हैं। विशिष्ट योग: अमृत-सर्वार्थसिद्धि व गुरु पुष्य योग सूर्योदय से सायं 5.12 तक है। करण: बव नामकरण प्रात: 10.12 तक, तदुपरान्त बालवादिकरण रहेंगे।




शुभ मुहूर्त 

आज लोक भेदानुसार पुष्य नक्षत्र में उपनयन, गृहारम्भ, प्रवेश, विपणि-व्यापारारम्भ, वधू-प्रवेश, नामकरण, अक्षरारंभ, विद्यारंभ, हलप्रवहण, द्विरागमन, कर्णवेध व कूपारम्भ आदि के अति आवश्यकता में शुभ मुहूर्त हैं। यद्यपि होलाष्टक दोष है।




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व्रतोत्सव

आज गोविन्द द्वादशी, मेला खाटू श्यामजी समाप्त (राज.) तथा जया महाद्वादशी व्रत है। 




दिशाशूल

गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा में दिशाशूल रहता है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज उत्तर दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद रहेगी। 



चन्द्रमा

चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि कर्क राशि में रहेगा। 




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राहुकाल

दोपहर बाद 1.30 से अपराह्न 3.00 तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासम्भव वर्जित रखना हितकर है।




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