बांसवाड़ा : उज्ज्वला योजना पर गरीबी की आंच, 50 फीसदी महिलाओं ने सिलेंडर नहीं कराया रीफिल

Banswara, Rajasthan, India
बांसवाड़ा : उज्ज्वला योजना पर गरीबी की आंच, 50 फीसदी महिलाओं ने सिलेंडर नहीं कराया रीफिल

50 फीसदी महिलाओं ने नहीं कराया दुबारा रीफिल, खाना बनाने के लिए अभी भी जलाते हैं चूल्हा

एक महिला जब लकडि़यों की सहायता से से खाना बनाती है तो उसके शरीर में एक समय में 400 सिगरेट का धुआं शरीर में जाता है। इससे कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं।


यह शब्द किसी और के नहीं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हैं और इसी को ध्यान में रखकर उज्जवला योजना के तहत बीपीएल महिलाओं को निशुल्क गैस कनेक्शन दिए गए। जिले में करीब 64 हजार से अधिक निशुल्क कनेक्शन दिए जा चुके हैं, लेकिन इनमें से 30 फीसदी महिलाएं भी गैस का उपयोग नहीं कर रही हैं।


महिलाएं मन में गैस के इस्तेमाल में खतरों के खौफ के चलते लाइटर जलाने से डर रही है। इसके साथ पैसे की तंगी ने प्रधानमंत्री की स्वास्थ्य और पर्यावरण को लेकर चिंताओं को हाशिये पर ला दिया है। राजस्थान पत्रिका संवाददाताओं ने योजना के लाभ की धरातल पर जाकर पड़ताल की तो यह कड़वा सच सामने आया।


700 रुपए कहां से लाएं



ठीकरिया के खारवेल गांव में महिलाओं ने अभी तक गैस टंकी का उपयोग नहीं किया है। एक महिला चूल्हे पर खाना बना रही महिला से जब पूछा गया तो वह बोली कि गैस रीफिल के लिए 700-800 रुपए कहां से लाए। गांव के रमेश ने बताया कि पैसे नहीं होने से टंकी कैसे भरवाएं।


परंपरागत रूप से कर रहे लकड़ी का इस्तेमाल


लोहारिया क्षेत्र में 396 कनेक्शन दिए जा चुके हैं। गांव की मौगी बाई कटारा ने बताया कि कनेक्शन लिए साल हो चुका है और दो बार रीफिल कराई है। अधिक उपयोग इसलिए नहीं करते कि अभी भी लकड़ी का अधिक उपयोग करते हैं।


छोटे बच्चों के कारण गैस का कम उपयोग



परतापुर: यहां गैस एजेंसी की ओर से 1535 कनेक्शन जारी किए हैं एवं अभी भी 194 महिलाओं को कनेक्शन देना शेष हैं। कनेक्शन जारी होने के बाद 40 फीसदी महिलाओं ने दो से चार माह होने के बाद भी रीफिल नहीं करवाई।


सिंदूरखोता निवासी सविता जादव ने अभी तक तीन बार और मंजा पत्नी सका बामनिया ने दस माह में केवल एक बार ही दुबारा गैस भरवाई। महिालाओं ने बताया कि छोटे बच्चों के कारण वह गैस का कम उपयोग कर चूल्हों पर ही खाना बनाना पसन्द करती हैं और गैस का उपयोग चाय बनाने में ही लिया जा रहा है।


कनेक्शन मिलने पर भी नहीं लिया


तलवाड़ा क्षेत्र में 4200 कनेक्शन दिए हैं, जिसमें से कई महिलाओं ने अभी तक दूसरी बार रीफिल ही नहीं कराया है। वहीं 450 से अधिक महिलाएं एेसी हैं जिन्होंने गैस कनेक्शन स्वीकृत होने के बावजूद लिया नहीं है। महिलाओं का कहना है कि गैस रीफिल कराने के लिए हर बार 700 रूपए तक का इंतजाम नहीं हो पाता है।


फैक्ट फाइल



तीन साल में राष्ट्रीय लक्ष्य—5 करोड़
डेढ़ साल में दिए-2.25 करोड़
राजस्थान में कनेक्शन दिए—19 लाख
बांसवाड़ा में कनेक्शन दिए—64 हजार
बांसवाड़ा में लक्ष्य—2 लाख 80 हजार


केस एक :- पालोदा निवासी रतन पाटीदार को योजना के तहत चार माह पहले कनेक्शन मिला था और पहली बार उपयोग करने पर ही चूल्हे में रिसाव हो गया तो इसका उपयोग ही बंद कर दिया।

केस दो :- बडलिया निवासी लक्ष्मी ने गत 6 माह से गैस रीफिल ही नहीं कराई। पति घर पर हो तो कभी कभार चाय बनाने के लिए गैस का उपयोग कर लेती है, लेकिन अकेले रहने की स्थिति में गैस का उपयोग करने से डर लगता है।


गैस पर काम करते लगता है डर


पालोदा: क्षेत्र की महिलाओं का कहना था कि गैस का उपयोग करने में उन्हें डर लगता है। इसके चलते दूसरी बार गैस रीफिल ही नहीं कराई। यहां स्वीकृत 500 कनेक्शन में से 430 महिलाओं को गैस कनेक्शन वितरित किए जा चुके हैं तथा शेष 70 कागजी कार्यवाही के कारण अटके हुए हैं। कस्बे में कुछ उपभोक्ता ऐसे भी हैं, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद अब तक इसका उपयोग ही नहीं किया।


कुछ घरों में अशिक्षा व अनभिज्ञता के कारण गैस चलाने में डर, तो कहीं पर टंकी व चूल्हों में रिसाव की शिकायत है। महिलाओं ने बताया कि ईंधन लकड़ी व गोबर के उपले की उपलब्धता के चलते गैस का उपयोग नहीं के बराबर उपयोग करते हैं। कस्बे में लालजी पाटीदार ने बताया कि घर में गैस का उपयोग केवल चाय बनाने में ही करते हैं।


घर में कोई हो तभी करती हैं गैस का उपयोग


गनोड़ा संवाददाता ने सोमवार को बड़लिया और आस-पास के गांवों में उन महिलाओं से सम्पर्क किया निन्हें निशुल्क कनेक्शन मिला। चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि इसमें से अधिकांश महिलाएं या तो गैस का उपयोग नहीं करती या तभी करती हैं जब घर में पति या अन्य कोई मौजूद हो।


कई महिलाओं ने बताया कि गैस का उपयोग करने में डर इसलिए लगता है कि कहीं इसमें विस्फोट न हो जाए। इसके चलते जब कनेक्शन मिला उसके बाद रीफिल ही नहीं कराई। गांव की सुगना नारजी ने बताया कि राशन लाने के लिए तो पैसे नहीं मिलते तो गैस कैसे भरवाएं। घाटोल क्षेत्र में योजना के तहत 10 हजार 850 कनेक्शन दिए गए हैं।


सिर्फ चाय बनाने तक सीमित


कुशलगढ़ : क्षेत्र में लाभार्थी महिलाओं में आधे से भी कम इसका नियमित उपयोग कर रही हैं। जो उपयोग कर भी रही हैं वह केवल चाय बनाने के लिए कर रही हैं। 3977 महिलाओं को कनेक्शन दिए हैं तथा इसमें से भी करीब 1500 से अधिक महिलाओं ने सिलेण्डर रीफिल कराया।


पोटलीया गांव की भावना, तारीया, कूपा ने बताया कि वह गैस का उपयोग चाय और कभी-कभार सब्जी बनाने में ही करती हैं। पैसों की कमी के कारण रीफिल नहीं करवा पाती। कई महिलाओ ने तो गैस लेने के बाद से अभी तक दुबारा गैस नहीं भरवाई।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned