मोदी जी...लड़कियों के लिए बिना शौचालय के स्कूल बनवा रहे हैं राजस्थान के अफसर

Baran, Rajasthan, India
मोदी जी...लड़कियों के लिए बिना शौचालय के स्कूल बनवा रहे हैं राजस्थान के अफसर

राजस्थान शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वच्छ भारत मुहिम में पलीता लगाने में जुटे हैं। खुले में शौच करने से रोकने के लिए लोगों को जागरुक करना तो दूर लड़कियों के स्कूल तक में शौचालय नहीं बनवा रहे। जबकि स्कूल की नई इमारत बनवाने पर इन अफसरों ने 65 लाख रुपए खर्च कर दिए।

स्वच्छ भारत अभियान के ब्रांड अम्बेसडर अमिताभ बच्चन हर 5 मिनट में टीवी पर शौचालय का दरवाजा बंद करने की सलाह दे रहे हैं। प्रधानमंत्री से लेकर गांव के प्रधान तक लोगों को खुले में शौच करने से रोक रहे हैं, लेकिन राजस्थान के अफसर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी मुहिम पर पलीता लगाने में जुटे हैं। लोगों को खुले में शौच करने से रोकने की बात तो छोड़ो, इन्हें लड़कियों के स्कूल तक में शौचालय बनाने से परहेज है। यकीन ना आए तो बारां के बमरौ कला गांव में बनी राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय नई इमारत को ही देख लीजिए। 





बमौरी कलां में राजकीय बालिका माध्यमिक विद्यालय की पुरानी इमारत खंडहर हो जाने के बाद क्षारबाग इलाके में 65 लाख रुपए की लागत ने नई इमारत बनवाई गई। जून के महीने में इसका निर्माण पूरा हुआ, लेकिन जब इस इमारत को हैंडओवर किया जाने लगा तो पता चला कि निर्माण कार्य करने वाली संस्था ने शौचालय ही नहीं बनाया है। जिसके बाद स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर छात्राओं और उनके परिजनों ने स्कूल की नई इमारत में आने से साफ इन्कार कर दिया। 65 लाख रुपए से इस स्कूल में आठ कमरों और बरामदों का निर्माण किया गया है, लेकिन शौचालय नहीं है। 



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इतने रुपए में शौचालय कहां बनता है!

ग्रामीणों ने जब इसकी शिकायत आला अफसरों से की तो कोई जवाब नहीं आया, लेकिन राजकीय माध्यमिक शिक्षा अधिकारी रामप्रसाद बैरवा से इस अनियमित्ता के बारे में बात की गई तो उन्होंने चौंकाने वाला जवाब दे दिया। बैरवा ने कहा कि जितना बजट स्वीकृत हुआ था उतना ही हमने काम करवाया है। यानि सरकार ने स्कूल में शौचालय बनवाने के लिए निर्माण कार्य करने वाली संस्था को बजट ही जारी नहीं किया था। हालांकि 



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अधिकारियों की लापरवाही से ग्रामीणों में रोष 

शाला समिति सदस्य राम भरोसे शर्मा ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर रोष जताते हुए कहते हैं कि शौचालय के निर्माण पर क्या 65 लाख रुपए से ज्यादा का खर्च आता है? वहीं ग्रामीण जगदीश प्रसाद ने कहा कि अफसरों को स्कूल का नक्शा बनाते समय ही सोचना चाहिए था कि शौचालय के बिना लड़कियां कहां जाएंगी? वह कहते हैं कि जब सरकार स्कूल की नई इमारत बनाने के लिए 65 लाख रुपए खर्च कर सकती है तो क्या उनके पास शौचालय के लिए पांच हजार रुपए नहीं है? सारी गलती अफसरों की है, पहले ध्यान नहीं दिया और अब बहाने बना रहे हैं। बहरहाल जो भी हो, लेकिन बारां शिक्षा विभाग के अफसरों की गलती के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी मुहिम को धक्का जरूर लगा है। 

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