तो कच्ची बस्तियां अब भी कच्ची ही रहेंगी!

bhawani singh

Publish: May, 19 2017 12:03:00 (IST)

Barmer, Rajasthan, India
तो कच्ची बस्तियां अब भी कच्ची ही रहेंगी!

- डी नोटिफाइड के बावजूद जारी नहीं होंगे पट्टे, पक्के मकान, सालों से निवास पर नहीं मिलेगा मालिकाना हक

शहर में रहकर भी कच्ची बस्ती का दंश सहने वाले हजारों घरों को अब भी मालिकाना हक नहीं मिल पाएगा। स्वायत्त शासन विभाग ने मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण योजना शिविर को भले पट्टा वितरण अभियान बना रखा है, लेकिन इसमें भी इन बस्तियों के बाशिंदों को पट्टे जारी नहीं होंगे। इसको लेकर विभाग ने बुधवार को ही आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।




मुख्यमंत्री शहरी जन कल्याण योजना के तहत संचालित शिविरों को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार स्टेट ग्रांट एक्ट के पट्टों को लेकर राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि चालीस साल या अधिक समय से नगरपालिका सीमा में रहने वाले परिवारों को ही प्लाट या मकान के पट्टे मिलेंगे, वह भी अधिकतम तीस सौ वर्ग मीटर तक। कच्ची बस्ती डी नोटीफाइई हो चुकी है तो भी उनमें स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट््टे नहीं दिए जाएंगे। क्योंकि स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत पट्टा केवल नजूल (आबादी ) भूमि पर ही दिया जा सकता है। स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत भी सैटबेक व सड़क की चौड़ाई के अनुरूप निर्माण होने पर ही पट्टे मिलेंगे।





तो शहर में मिलेंगे कम पट़्टे

नियमों के अनुसार तो थार नगरी में लोगों को ना के बराबर पट्टे मिल पाएंगे। चालीस से मालिकाना हक के चलते जिन लोगों ने इस दौरान जमीन खरीद कर मकान बनाएं हैं, लेकिन यहां की मतदाता सूची में नाम नहीं है तो पट्टे शायद ही मिल पाएंगे। आबादी भूमि के अनुसार चालीस साल पहले तो शहर के भीतरी इलाकों में ही इस योजना का लाभ मिलेगा, जबकि आबादी इन चालीस सालों में ही बढ़ी है और शहर का विस्तार हुआ है।





अधिकांश कच्ची बस्तियां

शहर के दस-बारह वार्ड कच्ची बस्ती में आते हैं। इन वार्र्डो में अत्याधुनिक सुविधाएं होने के बावजूद पट्टे नहीं बन पाएं हैं। बतौर उदाहरण इंदिरानगर, इंदिरा कॉलोनी, दानजी की होदी क्षेत्र, बलदेव नगर आदि क्षेत्र एेसे हैं, जो तेजी से विकसित हुए हैं, लेकिन स्टेट ग्रांट योजना में सम्मिलित नहीं होने से पट़्टे नहीं मिल पाएंगे। 

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned