बड़ा अफसर ही मिला, ठेकेदार नहीं दे रहा भाव

rajesh khandelwal

Publish: Jul, 12 2017 12:34:00 (IST)

Bharatpur, Rajasthan, India
बड़ा अफसर ही मिला, ठेकेदार नहीं दे रहा भाव

शहर में रोड लाइटों का काम देख रही कंपनी का ठेकेदार नगर निगम को भाव ही नहीं दे रहा है। इससे बुरी तरह दुखी हो चुके निगम के पास सरकार तक चिल्लाने के अलावा कोई उपाय नहीं रहा है।

शहर में रोड लाइटों का काम देख रही कंपनी का ठेकेदार नगर निगम को भाव ही नहीं दे रहा है। इससे बुरी तरह दुखी हो चुके निगम के पास सरकार तक चिल्लाने के अलावा कोई उपाय नहीं रहा है।


बार बार उच्च स्तर पर शिकायत कर देने पर भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है, जिससे परेशान निगम अब आरोप लगा रहा है कि शायद कंपनी से ही विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत है। अब खराब रोडलाइटों की बात फिर उठी है तो निगम आपात बैठक बुलाने की तैयारी कर रहा है।


बिजली बचत के नाम पर शहर की पुरानी लाइटों के स्थान पर नई एलईडी लाइट लगाने का काम मनमर्जी का खेल हो गया है।


प्रभारी मंत्री के सामने अपनी बेबसी बयां करने के बाद भी मंगलवार को उक्त कार्य कर रही कम्पनी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। कम्पनी की मनमानी से तंग निगम ने इस मुद्दे पर आपात बैठक बुलाने का निर्णय किया है।


शुरू से मनमानी


सरकार ने निगम की लाइटों को बदलने का ठेका ईईएसएल कम्पनी को दिया था। उक्त कम्पनी ने ठेके को सबलेट कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इसके बाद से रोड लाइटों की समस्या कोढ़ में खाज बन गई और  ईईएसएल व उसकी अधीनस्थ कम्पनी पर मनमानी के आरोप लगते रहे लेकिन खराब लाइटें आज तक नहीं सुधरी।


न ऑफिस खुला, न हेल्पलाइन चली


सरकार से हुए एमओयू में कम्पनी को भरतपुर में अपना कार्यालय खोलना था और जनहित में एक हेल्पलाइन नम्बर जारी करना था। नगर निगम बोर्ड की कई बैठकों में इस मुद्दे पर हंगामा हो चुका है। कम्पनी के प्रतिनिधि एक सप्ताह में ऑफिस खोलने तथा हेल्पलाइन नम्बर जारी करने का आश्वासन तो दे जाते हैं लेकिन उसकी पालना नहीं करते।


थमा दिया पत्र


कम्पनी की इस कार्यशैली से नाराज डिप्टी मेयर इंद्रपालसिंह पाले तथा नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष इंद्रजीत भारद्वाज ने मेयर शिवसिंह भोंट से बोर्ड की आपातकालीन बैठक बुलाने मांग कर दी है। बैठक  में ईईएसएल कम्पनी के प्रतिनिधि को भी बुलाने की मांगी की गई है, जिसके बाद मेयर ने आयुक्त को तत्काल बैठक बुलाने के आदेश जारी कर दिए।


ऊपर के संरक्षण का आरोप


निगम के प्रतिनिधि आरोप लगाने लगे हैं कि एलईडी ठेका कम्पनी को डीएलबी विभाग के उच्च अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है। जब निगम से उक्त कम्पनी के कामकाज को लेकर शिकायत की जाती है तो शिकायतें सुनने के बजाए उक्त अधिकारी उल्टी निगम को ही नसीहत दे देते हैं। इस बात की जानकारी प्रभारी मंत्री को भी दी चुकी है, लेकिन इस उच्च अधिकारी पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।


-हमने तो प्रभारी मंत्री कालीचरन सर्राफ के सामने इस मुद्दे को उठाया है। उन्हें कहा है कम्पनी वाले हमारी नहीं सुन रहे।
-शिवसिंह भोंट, मेयर, नगर निगम, भरतपुर

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