स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अनदेखी, नियम कायदे ताक पर रख दौड़ रहीं बाल वाहिनी

rohit sharma

Publish: Jul, 15 2017 11:31:00 (IST)

Bharatpur, Rajasthan, India
स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अनदेखी, नियम कायदे ताक पर रख दौड़ रहीं बाल वाहिनी

बाल वाहिनी के संचालन व स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन, पुलिस तथा परिवहन विभाग पूरी तरह से बेपरवाह बने हुए हैं। परिवहन विभाग ने बाल वाहिनी संचालन के लिए कायदे तो लम्बे-चौड़े बना दिए, लेकिन इनकी पालना के कोई इंतजाम नहीं हैं।

बाल वाहिनी के संचालन व स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन, पुलिस तथा परिवहन विभाग पूरी तरह से बेपरवाह बने हुए हैं। परिवहन विभाग ने बाल वाहिनी संचालन के लिए कायदे तो लम्बे-चौड़े बना दिए, लेकिन इनकी पालना के कोई इंतजाम नहीं हैं।

शहर व जिले भर में नियमों को ताक पर रखकर बाल वाहिनी सडक़ों पर दौड़ रही हैं और विभाग के आला अफसर बेखबर बने बैठे हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के पास तो बाल वाहिनी के खिलाफ की गई कार्रवाई के कोई आंकड़े ही उपलब्ध नहीं हैं। बाल वाहिनी योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए गठित की गई समिति की भी कई माह से बैठक नहीं हुई है।


ऑटो ड्राइवर के पैरों में बैठकर यात्रा कर रहे बच्चे 


परिवहन विभाग के नियमानुसार ऑटो में ड्राइवर की सीट पर बच्चों का परिवहन नहीं किया जा सकता, लेकिन शुक्रवार को राजेन्द्र नगर क्षेत्र में एक निजी स्कूल के ऑटो में न केवल बच्चे ड्राइवर की सीट पर बैठकर यात्रा कर रहे थे बल्कि एक बच्चे को तो जान जोखिम में डालकर चालक के पैरों के पास बैठा रखा था। इतना ही नहीं चालक की सीट पर बैठे बच्चों के पैर ऑटो से बाहर झूलते रहते हैं। पत्रिका टीम ने शहर के कई क्षेत्रों में ऑटो व बाल वाहिनी के रूप में संचालित वाहनों का जायजा लिया तो ऐसे ही हालात नजर आए। 


न जाली, न सुरक्षा 


नियमानुसार परिवहन के समय ऑटो में बच्चों की सुरक्षा के लिए बांई और (चढऩे/उतरने वाले गेट पर) लोहे की जाली लगाकर बंद करना चाहिए... लेकिन शहरभर में स्कूल बच्चों का परिवहन करने वाले ऑटो में इस नियम की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। ऑटो में क्षमता से ज्यादा बच्चों का परिवहन किया जाता है और उनकी सुरक्षा के लिए लोहे की जाली आदि के भी इंतजाम नहीं किए गए हैं।ऐसे में बच्चों पर दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है। 


ये कायदे भी ताक पर 


नियमानुसार बस/वैन/कैब/ऑटो के पीछे विद्यालय का नाम, फोन नम्बर, अनिवार्य रूप से लिखा होना चाहिए लेकिन इसकी भी पालना नहीं की जाती। साथ ही बस के अंदर चालक का नाम, पता, लाइसेंस नम्बर, वेज नम्बर, वाहन स्वामी का नाम व मोबाइल नम्बर, चाइल्ड हेल्प लाइन, यातायात पुलिस व परिवहन विभाग हेल्प लाइन नम्बर भी लिखा होना चाहिए जो कि नहीं होता। 


कई माह से नहीं हुई स्थाईसमिति की बैठक 


नियमानुसार बाल वाहिनी योजना के सुचारू व सफल क्रियान्वयन के लिए स्थाई संयोजक समिति गठित की गई। समिति में पुलिस अधीक्षक अध्यक्ष व सदस्य के रूप में जिला कलक्टर द्वारा मनोनीत उपखण्ड अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, पीडब्ल्यूडी सहायक अभियंता, यातायात पुलिस प्रभारी व परिवहन विभाग के अधिकारी समेत कई विभाग के अधिकारी शामिल हैं। समिति की हर तीन माह में बैठक होनी चाहिए और उसकी रिपोर्टजिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित यातायात प्रबंधन समिति के समक्ष प्रस्तुत होनी चाहिए। लेकिन भरतपुर में लम्बे समय से इस समिति की बैठक ही आयोजित नहीं की गई। 


दुर्घटना के बाद टूटी नींद


परिवहन विभाग यूं तो लम्बे समय से नियमविरुद्ध संचालित बाल वाहिनी की ओर से नजरें फेरे बैठा था लेकन अब गुरुवार को हुईबस दुर्घटना के बाद नींद खुली है। अब विभाग ने जिलेभर में संचालित बाल वाहिनी की जांच के आदेश जारी किए हैं।

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