मेवात में फैली अफवाह, स्कूलों में बच्चों की संख्या घटकर रह गई आधी

rohit sharma

Publish: Mar, 09 2017 12:07:00 (IST)

Bharatpur, Rajasthan, India
मेवात में फैली अफवाह, स्कूलों में बच्चों की संख्या घटकर रह गई आधी

जिले के मेवात क्षेत्र में स्कूली बच्चों के पेट में टीके लगाने की फैलती जा रही अफवाह ने बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। अफवाह के चलते अभिभावकों ने बच्चों को

जिले के मेवात क्षेत्र में स्कूली बच्चों के पेट में टीके लगाने की फैलती जा रही अफवाह ने बच्चों के भविष्य पर संकट खड़ा कर दिया है। अफवाह के चलते अभिभावकों ने बच्चों को


स्कूल भेजना ही बंद कर दिया है, जिससे शिक्षा विभाग भी गहरी चिंता में डूब गया है। प्रशासनिक मशीनरी लोगों को अफवाह से दूर रखने और व्यापक स्तर पर प्रचार करने में विफल साबित हो रही है।


एक पखवाड़े से चल रही अफवाह का दुष्प्रभाव यह हो चला है कि कामां, नगर तथा पहाड़ी ब्लॉक के सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घटकर 50 फीसदी से भी कम रह गई है। अफवाह दूर करने के लिए शिक्षा से लेकर चिकित्सा अधिकारियों की ओर से कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन जमीनी असर ज्यादा नजर नहीं आ रहा है। तीनों ब्लॉक में एक पखवाड़े पहले अफवाह फैली थी कि कोई टीम स्कूलों में जाकर बच्चों के पेट में टीके लगाती है।


इस अफवाह से प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में आने वाले बच्चों की संख्या में दिनोंदिन गिरावट होने लगी। यह अब भी जारी है। कुछ दिन बाद इन बच्चों की परीक्षाएं होनी हैं, ऐसे में स्कूल नहीं आने के चलते इनकी पढ़ाई बर्बाद हो रही है।


गाड़ी देख भाग जाते हैं बच्चे


जैसे ही विद्यालय के पास कोई भी गाड़ी आती है तो विद्यालय में मौजूद बच्चे उसे देखकर भाग जाते है। फिर बच्चे विद्यालय ही नहीं आते।
30 हजार नामांकन, आ रहे 15 हजार
जिले के नगर, कामां तथा पहाड़ी ब्लॉक में प्रारम्भिक शिक्षा विभाग के 339 स्कूल मौजूद हैं। जिनमें 30 हजार 598 विद्यार्थी नामांकित हैं। लेकिन अफवाह के चलते इन दिनों 15 हजार विद्यार्थीही रह गए।


दम तोड़ती समझाइश


शिक्षा विभाग के जिले से लेकर ब्लॉक स्तर के अधिकारियों की ओर से गांव-गांव का दौरा कर परिजनों से समझाइश की जा रही है परंतु इसका कोईअसर देखने को नहीं मिल रहा है। दूसरी ओर, चिकित्सा विभाग भी गांवों में बैठकें कर समझाइश कर रहा है।


अगले सत्र नामांकन की चिंता


क्षेत्र में फैली अफवाह यदि समय रहते दूर नहीं हुई तो सरकारी स्कूलों में नामांकन का लक्ष्य पूरा होने बजाए घटने की नौबत आ सकती है। नामांकन को बढ़ाने के लिए पिछले कुछ सालों से विशेष जोर दिया जा रहा है। यदि इसमें कमी आएगी तो शिक्षकों को इस संबंध में चार्जशीट भी मिल सकती है।

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