बंद रही 150 फैक्ट्रियां, ढाई हजार मजदूर रहे ठाले, सड़क पर उतरे व्यापारी

Rakesh gotam

Publish: Jul, 17 2017 09:29:00 (IST)

Churu, Rajasthan, India
बंद रही 150 फैक्ट्रियां, ढाई हजार मजदूर रहे ठाले, सड़क पर उतरे व्यापारी

विश्वकर्मा उद्योग संघ औद्योगिक क्षेत्र चूरू के बैनर तले लामबंद हुए उद्योगपतियों व मजदूरों ने सोमवार को औद्योगिक क्षेत्र में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन कटवाने की कार्रवाई का विरोध जताया।

विश्वकर्मा उद्योग संघ औद्योगिक क्षेत्र चूरू के बैनर तले लामबंद हुए उद्योगपतियों व मजदूरों ने सोमवार को  औद्योगिक क्षेत्र में राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से चार फैक्ट्रियों के बिजली कनेक्शन कटवाने की कार्रवाई का विरोध जताया।




एक दिन की हड़ताल के कारण चूरू औद्योगिक क्षेत्र में संचालित हैंडीक्राफ्ट, ग्रेनाइट, चौखट निर्माण, दाल मील, ग्वार गम की करीब 150 फैक्ट्रियों पर ताला लगा रहा। धुआं उगलती चिमनियां बंद रही और  शोर करती मशीनें बंद रहने से फैक्ट्रियों में काम करने वाले करीब ढाई हजार मजदूर ठाले रहे। इससे करीब 60-70 लाख रुपए का उत्पादन नहीं हो सका। 




सुबह 11 बजे रीको कार्यालय के आगे धरने पर बैठे उद्योगपतियों व मजदूरों ने सरकार व प्रशासन विरोधी नारेबाजी कर कार्रवाई को नाजायज करार दिया। वक्ताओं ने कहा कि बिना मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाए उद्योगपतियों पर नियम-कायदे थोपे जा रहे हैं। जिन्हें सहन नहीं किया जाएगा। 



बाद में यहां से वाहन रैली के रूप में रवाना हुए उद्योगपति-मजदूर केंद्रीय विद्यालय के पास एकत्रित हुए। यहां से सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए जुलूस के रूप में रवाना होकर कलक्ट्रेट पहुंचे और आक्रोश जताया। पुलिस की ओर से कलक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए जाने पर पुलिस व उद्यमियों के बीच हल्की बहस हुई। बाद में  प्रतिनिधिमंडल में शामिल कुछ पदाधिकारी ही अंदर जाने पर सहमति बन गई। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।




ज्ञापन में लिखा गया कि पर्यावरण एनओसी के बहाने उद्यमियों को प्रताडि़त करने की नीयत से कार्रवाई की जा रही है। रीको जल निकासी की व्यवस्था में  विफल रहा है। इसके बावजूद उद्योगपतियों पर जल प्रदूषण के आरोप थोपे जा रहे हैं। जो न्याय संगत नहीं है। किसी नियम की अवहेलना होने पर बिजली कनेक्शन काटना अंतिम कार्रवाई है। मगर बिना किसी चेतावनी के कनेक्शन काट दिए गए जो अन्याय है। अनेक उद्योगपतियों की ओर से  पर्यावरण एनओसी के लिए किए गए आवेदन लंबित पड़े हैं। चूरू औद्योगिक क्षेत्र में लगभग सभी इकाईयां सुक्ष्म उद्योग श्रेणी की हैं। मगर उन पर बड़े व मध्यम उद्योगों के लिए बने नियम-कानून थोपे जा रहे हैं। 




अध्यक्ष विश्वनाथ जांगिड़ के नेतृत्व में किए गए धरना-प्रदर्शन में मंत्री अजीत भाऊवाला, पूर्व अध्यक्ष दौलत तंवर, धर्मेंद्र बुडानिया, भास्कर शर्मा, लीलाधर जांगिड़, सुभाष जांगिड़, शंकरलाल जांगिड़, राजू बेरवाल, नीटू बुडानिया, सिद्धार्थ जांगिड़, नरेंद्र कंवल, नारायण किरोड़ीवाल, जयंत प्रजापत, कमल जांगिड़ सहित सैकड़ों उद्योगपति व मजदूर शामिल थे।

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