दिल्ली हाईकोर्ट : जेएनयू के 21 छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज, अदालत ने वीसी दफ्तर से 100 मीटर दूर रहने के दिए आदेश

New Delhi, Delhi, India
दिल्ली हाईकोर्ट : जेएनयू के 21 छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज, अदालत ने वीसी दफ्तर से 100 मीटर दूर रहने के दिए आदेश

प्रदशनकारियों ने फिलहाल बिना किसी औपचारिक घोषणा के प्रशासनिक खंड के सामने धरना-प्रदर्शन बंद कर दिया है।

दिल्ली में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय एक फिर चर्चा में है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के कुलपति व अन्य अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। 




निर्देश जेएनयू के प्रशासनिक खंड पर छात्रों द्वारा लगातार किए जा रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक जेएनयू प्रशासन ने कुलपति जगदीश के कुमार के साथ दुर्व्यवहार करने वाले छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्यवाई करने की मांग की है। 




तो वहीं जेएनयू रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार की ओर से की गई शिकायत और घटना के वीडियो को आधार मानकर वसंत कुंज पुलिस थाने में जेएनयू के 21 छात्रों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है।  अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त चिन्मय बिस्वाल के मुताबिक, पुलिस ने छात्रों के खिलाफ शांति भंग करने के अलावा उनके साथ जानबूझ कर दुर्व्यवहार और अपमानित करने को लेकर मामला दर्ज किया है।  



न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने प्रदर्शनकारियों को भी निर्देश दिया कि वे प्रशासनिक खंड से 100 मीटर दूर ही रहकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करें। अदालत ने जेएनयू छात्रसंघ को इस आशय का नोटिस भी जारी किया है।




अदालत ने जेएनयू छात्रसंघ के पदाधिकारियों को मामले की सुनवाई की अगली तारीख पर हाजिर होने और आंदोलन की वजह बताने का निर्देश दिया। अदालत का मानना है कि समस्या का हल बातचीत, परामर्श और ध्यान (मेडिटेशन) से हो सकता है। अदालत जेएनयू प्रशासन की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया है कि आंदोलनकारी छात्र प्रशासनिक खंड में प्रवेश करने का रास्ता अवरुद्ध कर देते हैं, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।




आंदोलनकारी छात्रों ने 9 फरवरी को प्रशासनिक खंड पर कब्जा जमा लिया था। छात्रों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी एक अधिसूचना के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया, जिसके तहत एमफिल और पीएचडी कोर्सों की सीटों में कटौती सहित जेएनयू की दाखिला नीति में बदलाव लाया जाना है।




प्रदशनकारियों ने फिलहाल बिना किसी औपचारिक घोषणा के प्रशासनिक खंड के सामने धरना-प्रदर्शन बंद कर दिया है। 

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