सेहत से खिलवाड़, डराकर लालच में निकाले 2200 महिलाओं के यूट्रस

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सेहत से खिलवाड़, डराकर लालच में निकाले 2200 महिलाओं के यूट्रस

कर्नाटक के कलबुर्गी में एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो महिलाओं के गर्भाशय को निकालने का काम करता था।

कर्नाटक के कलबुर्गी में एक ऐसे रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो महिलाओं के गर्भाशय को निकालने का काम करता था। इस तरह के नापाक काम में चार अस्पतालों के शामिल होने का आरोप है। कलबुर्गी के स्थानीय लोग पिछले दो वर्ष से इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अभी तक अस्पतालों के खिलाफ  कार्रवाई नहीं हुई है। जिन 2200 महिलाओं के गर्भाशय को निकाले जाने का मामला सामने आया है, वो लुंबानी और दलित समुदाय से ताल्लुक रखती हैं।



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पेट दर्द...कैंसर से डराकर निकाला यूट्रस

पीडि़त महिलाओं  की उम्र 40 साल तक है। पेट में दर्द की शिकायत लेकर जब वो अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचती थीं तो डॉक्टर ने उन्हें पेट में कैंसर बता कर डरा देते थे और गर्भाशय (यूट्रस) निकलवाने की सलाह देते थे। महिलाओं ने डर के चलते अपना गर्भाशय निकलवा दिया।



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लाइसेंस रद्द, फिर भी चल रहे अस्पताल

एक अंग्रेजी दैनिक के मुताबिक, कर्नाटक के कुलबर्गी में चल रहे इस रैकेट का भंडाफोड़ लगभग डेढ़ साल पहले हुआ था। उस समय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मामले की जांच करके अस्पतालों का लाइसेंस भी रद्द कर दिया था, लेकिन इसके वाबजूद इन अस्पतालों ने अपना कालाधंधा चालू रखा। रैकेट का पर्दाफाश अगस्त, 2015 में हुआ था और अक्टूबर 2015 में स्वास्थ्य विभाग की जांच समिति ने चार अस्पतालों के लाइसेंस रद्द कर दिए थे, लेकिन वे अस्पताल आज भी कार्य कर रहे हैं।



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विरोध प्रदर्शन...कार्रवाई की मांग

सोमवार को हजारों की संख्या में प्रभावित महिलाओं और कार्यकर्ताओं ने कलबुर्गी उपायुक्त के कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया। महिलाओं ने गैर सरकारी संगठनों जैसे वैकल्पिक कानून फोरम, विमोचना और बंगलूरु में स्वराज अभियान के माध्यम से अपनी आवाज उठाई। महिलाओं व प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि मानवाधिकार का घोर उल्लंघन करने वाले इन अस्पतालों  व डॉक्टरों के खिलाफ  कड़ी कार्रवाई हो और उन्हें सजा मिले।



प्रशासनिक मिलीभगत भी!

आरोपी अस्पतालों में बसवा अस्पताल जिस डॉक्टर के नाम पर रजिस्टर था, वह व्यक्ति एक सरकारी कर्मचारी था जो अपने आप में नियम का उल्लंघन है। खबर के मुताबिक लाइसेंस रद्द होने के बाद भी अस्पतालों का कार्यरत रहना दर्शाता है कि इस बड़े रैकेट में स्थानीय स्वास्थ्य  अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है।

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