शर्मनाकः पति के इलाज के लिए मां ने ही कर दिया अपने कलेजे के टुकड़े का सौदा

Abhishek Pareek

Publish: Apr, 21 2017 11:05:00 (IST)

National News
शर्मनाकः पति के इलाज के लिए मां ने ही कर दिया अपने कलेजे के टुकड़े का सौदा

त्रिपुरा में खोवई जिले की एक आदिवासी महिला का बीमार पति के इलाज के लिए अपने नवजात बेटे का मात्र कुछ हजार रुपये में सौदा करने का मामला प्रकाश में आया है।

त्रिपुरा में खोवई जिले की एक आदिवासी महिला का बीमार पति के इलाज के लिए अपने नवजात बेटे का मात्र कुछ हजार रुपये में सौदा करने का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना को लेकर प्रशासन में हड़कम्प मच गया है क्योंकि महज आठ माह बाद होने वाले विधान सभा चुनावों को देखते हुए विपक्ष इस घटना को सत्तारूढ़ वाम दल के खिलाफ महत्वपूर्ण 'हथियार' के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ वाम दल सरकार की हो रही किरकिरी के बीच प्रशासन ने कहा है कि उसे इसके बारे में औपचारिक रूप से अवगत नहीं कराया गया है। 




रिपोर्ट के अनुसार दिहाड़ी मजदूर उषा रजंन देववर्मा लंबे समय से कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित है और उसकी पत्नी दीनमाला घर का खर्च उठा रही थी। उनकी माली हालत बेहद खराब थी। परिवार की परेशानी और बढ़ गर्इ जब तीन बेटों की मां दीनमाला ने 17 अप्रैल को एक और बेटे को जन्म दिया। दीनमाला परिवार और पति की दवाइयों के खर्चे को लेकर गंभीर चिंता में पड़ गर्इ। 




इस बीच उसकी एक पड़ोसन ने उसे समस्या से निपटने के लिए सुझाव दिया कि वह अपने नवजात बच्चे को पैसे वाले एक दम्पति को बेच दे, उनकी संतान नहीं है और वे इसे खरीद लेगें। पैसे -पैसे को मोहताज दीनमाला को यह प्रस्ताव अच्छा लगा और उसने बेटे को मात्र सात हजार छह सौ रुपए में बेच दिया। 




खबर मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता एस कुमार जमातिया दीनमाला के गांव पहुंचे और सच्चाई का पता लगाया। उन्होंने तुरंत संभागीय जिला मजिस्ट्रेट टी जयंत देव को इस घटना से अवगत कराया और बच्चे को वापस लाने की मांग की। इसके अलावा जमातिया ने दीनमाला को आर्थिक सहायता देने और उसके पति के इलाज की भी मांग की। 




इस बीच देव ने कहा, 'सूचना मिलने के बाद हमारी एक टीम दीनमाला के गांव गयी और उषा रंजन को इलाज के लिए अस्पताल चलने को कहा लेकिन परिवार ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। परिवार का तर्क था कि चूंकि दीनमाला बीमार है इसलिए अभी उषा रंजन को अस्पताल नहीं भेजा जा सकता है क्योंकि उसके साथ अस्पताल में रहने वाला कोई नहीं है। काफी जिद करने पर वे अस्पताल के लिए राजी हो गए लेकिन उन्होंने इस बात से इंकार कर दिया कि उन्होंने अपना कोई बच्चा बेचा है।' देव ने कहा कि यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर दीनमाला के परिवार ने सरकार के सामाजिक सहायता कार्यक्रम में पंजीयन क्यों नहीं करवाया और बीपीएल कार्ड क्यों नहीं लिया।




 जातिया ने आरोप लगाया कि इस घटना से एक बार और साबित हो जाता है कि वाम दल सरकार में गरीब किस तरह उपेक्षित हैं और सरकार ने किस तरह से उनकी तरफ से आंखें बंद की है। यह गांव कृष्णापुर निर्वाचन क्षेत्र में पड़ता है और मत्स्य, सहकारिता एवं दमकल मामलों के मंत्री खगेन्द्र जमातिया लगातार पांचवीं बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, लेकिन मंत्री को गरीब आदिवासियों की परेशानियों से दूर-दूर तक कोई लेना देना नहीं है। 

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