महागठबंधन में बढ़ी दरार, तेजस्वी को हटाने पर नीतीश ने साधा मौन, कल विधायक दल की बुलार्इ बैठक

Abhishek Pareek

Publish: Jul, 15 2017 06:32:00 (IST)

National News
महागठबंधन में बढ़ी दरार, तेजस्वी को हटाने पर नीतीश ने साधा मौन, कल विधायक दल की बुलार्इ बैठक

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को हटाने को लेकर मौन साध गए।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को हटाने को लेकर मौन साध गए। तेजस्वी को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने नीतीश कुमार से सवाल किया तो वे हाथ जोड़कर आगे बढ़ गए। तेजस्वी के इस्तीफे को लेकर महागठबंधन में तकरार बढ़ती जा रही है आैर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। अब नीतीश कुमार ने रविवार को विधायक दल की बैठक बुलार्इ है। माना जा रहा है कि इसके बाद ही पूरी स्थिति साफ हो सकेगी।



तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद राजद आैर जेडीयू में एक दूसरे के खिलाफ लगातार बयानबाजी हो रही है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार अपनी साफ सुथरी छवि से किसी भी तरह समझौता करने के लिए तैयार नहीं है आैर वहीं तेजस्वी इस्तीफा नहीं देना चाहते। एेसे में महागठबंधन कितने दिन चलेगा कहना मुश्किल है। एेसे में दोनों आेर से जुबानी जमा खर्च कुछ ज्यादा हो ही हो गया है।



बिहार में एक कार्यक्रम में शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आैर उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव एक ही मंच पर नजर आने वाले थे, लेकिन तेजस्वी कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। पटना के ज्ञान भवन में वर्ल्ड यूथ स्किल डे के मौके पर आयाेजित एक कार्यक्रम में नीतीश मुख्य अतिथि थे। तेजस्वी की भी कुर्सी आैर नेम प्लेट रखी गर्इ थी। हालांकि जब तेजस्वी नहीं पहुंचे तो नेम प्लेट को ढक दिया गया आैर फिर इसे हटा लिया गया। ये वाकया बताता है कि राजद आैर जेडीयू के बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं।



लालू ने जब जेडीयू के बयानों से आहत होकर साफ कह दिया कि वह अब 27 अगस्त की रैली में जवाब देंगे तो जेडीयू की आेर से भी तुरंत पलटवार किया गया। जेडीूय ने लालू को बुजुर्ग बताते हुए कहा कि वे बुजुर्गियत के चलते अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं।




जानकार मानते हैं कि महागठबंधन में आर्इ इस दरार का सीधा फायदा भाजपा को होने जा रहा है। यदि महागठबंधन टूटा तो राजद आैर जेडीयू के रास्ते अलग होंगे आैर फिर भाजपा को सियासी जमीन तैयार करने का एक आैर मौका मिल जाएगा। वहीं राजद ने यदि जेडीयू से समर्थन वापस लिया तो फिर भाजपा आैर सहयोगी दल नीतीश को सपोर्ट कर सकते हैं जिनके पास 58 विधायक हैं। हालांकि ये खुद जेडीयू के लिए दिक्कत पैदा कर सकता है क्योंकि ये माना जाता है कि जेडीयू का वोट बैंक बीजेपी को पसंद नहीं करता है।



मामला चाहे जीतनराम मांझी का हो या फिर अनंत सिंह से जुड़ा। नीतीश ने अपनी स्वच्छ छवि से कभी भी समझौता नहीं किया है। एेसे में वे तेजस्वी को सरकार में रखकर अपनी छवि से समझौता करेंगे एेसा कम ही लगता है। अब सभी की नजर रविवार को होने वाली विधायक दल की बैठक पर होगी।

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