Inspiring Story : 73 साल के चंद्रभान 30 साल से कर रहे हैं लोगों को जागरूक, बांट रहे हैं उनके घर का पता

vijay ram

Publish: May, 15 2017 06:37:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
Inspiring Story : 73 साल के चंद्रभान 30 साल से कर रहे हैं लोगों को जागरूक, बांट रहे हैं उनके घर का पता

वे शहर के विभिन्न इलाकों के साथ हरिद्वार, कटरा, कनखल, दिल्ली आदि स्थानों में भी अपने खर्चें पर अब तक मकान और प्रतिष्ठानों के नम्बर लिखवाने के संदेश देने वाले सौ से अधिक बोर्ड लगवा चुके हैं। बाकी कहानी में पढें...

उम्र चाहे कितनी भी हो, काम के जुनून में कभी आड़े नहीं आती। कुछ ऐसा ही है 73 वर्षीय चंद्रभान के साथ। वे डाक एवं तार विभाग में टेलीग्राफर की नौकरी से भले ही रिटायर्ड हो चुके हों, लेकिन उनका मिशन अभी भी जारी है।



नौकरी के दौरान उन्हें जो परेशानियां हुईं, वो किसी दूसरे को न हों इसलिए वे मकान-दुकानों के आगे नाम लिखवाने के लिए जागरुक करने की मुहिम अपने साथी मूलचंद सैनी के साथ चला रहे हैं। चंद्रभान पिछले 30 साल से साइकिल पर घूम-घूम कर लोगों को अपने घर और प्रतिष्ठानों के बहार उनके नम्बर प्लेट लिखने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।



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वे शहर के विभिन्न इलाकों के साथ हरिद्वार, कटरा, कनखल, दिल्ली आदि स्थानों में भी अपने खर्चें पर अब तक मकान और प्रतिष्ठानों के नम्बर लिखवाने के संदेश देने वाले सौ से अधिक बोर्ड लगवा चुके हैं। नौकरी के दौरान घरों और प्रतिष्ठानों के बहार लगी नेमप्लेट पर पूरा पता नहीं लिखा होने की परेशानी भुगत चुके चंद्रभान ने बताया कि लोग मकान की खुबसूरती के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन बहार प्लॉट नम्बर नहीं लिखवाते। एेसे में लोगों को पता खोजने में परेशानी होती है। इसीलिए मैंने खुद के खर्चें पर प्लॉट नम्बर और पता लिखवाना शुरू किया। इससे कई लोग प्रेरित हो इस अभियान से जुडऩे लगे।



इसलिए जरूरी है प्लॉट नंबर लिखना

चंद्रभान का कहना है कि लोग इसे मामूली सी बात समझते हैं, लेकिन कई बार उनकी छोटी सी गलती के कारण बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ जाता है।  मकान पर पता लिखा हुआ नहीं होने से महत्वपूर्ण पत्र, रजिस्ट्री, इंटरव्यू कॉल लेटर सहित कई दस्तावेज सही समय पर लोगों तक नहीं पहुंच पाते हैं। मूलचंद सैनी का कहना है कि शुरू में लोगों ने उनके इस कार्य का उपहास किया, लेकिन चंद्रभान अपनी धुन के पक्के निकले।


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