राजस्थान: नौकरी से निकाले गए इन श्रमिकों का धरना 4160 दिनों से जारी, 10 आत्महत्या हुईं, 396 ने तोडा मुफलिसी के चलते दम

vijay ram

Publish: Mar, 17 2017 01:16:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
राजस्थान: नौकरी से निकाले गए इन श्रमिकों का धरना 4160 दिनों से जारी, 10 आत्महत्या हुईं, 396 ने तोडा मुफलिसी के चलते दम

सरकार का किया समझौता ही अब तक लागू नहीं हुआ। बता दें कि यहां 396 श्रमिक दम तोड़ चुके हैं और बाद में 10 जने आत्म हत्या भी कर चुके....

राजनीतिक जटिलताओं में उलझे सरकार के राजस्थान में मेटल उद्योग के बंद होने से बेरोजगारी झेल रहे श्रमिक आज भी मुफलिसी की जिंदगी जी रहे हैं। उनके जयपुर में 4160 दिन से चल रहे धरने ने भी आंदोलन का रिकार्ड तोड़ दिया है। फिर भी सरकार से कोई रेस्पॉन्स नहीं आया...



उद्योग, जिससे रोजी-रोटी मिलती थी, यूं हुआ था बंद

कारखाना चलाने के लिए सरकार ने 24 जुलाई 2007 में एक निजी कम्पनी के साथ समझौता किया था। इस समझौते के अब तक लागू नहीं होने से कारखाने के श्रमिकों का भविष्य अंधकार मय हैं।


jaipur/jaipur-metal-workers-cross-4145-day-in-protest-but-the-government-has-not-given-any-response-2487870.html">
Read: फरियादी प्यासे, मंत्री गटक रहे हैं बोतलबंद पानी; भाजपा मुख्यालय पर जनसुनवाई का ऐसा हाल

वर्ष 2000 में जयपुर मेटल कारखाने के 1558 श्रमिकों को बिना वेतन दिए अचानक ताला लगा दिया गया था। इसके बाद वर्ष 2007 में एक निजी कम्पनी के साथ समझौता किया गया।



कारखाना बंद होने के बाद 396 श्रमिकों ने मुफलिसी के चलते दम तोड़ दिया। दस श्रमिकों ने आत्म हत्या कर जीवन लीला को खत्म कर दिया। अब तक 410 श्रमिक सेवानिवृत भी हो चुके हैं। बेरोजगार हुए चार श्रमिक आज भी पागल हुए बाजारों में चिल्लाते हुए नजर आते हैं।



जयपुर मेटल श्रमिकों के धरने को 4160 दिन पूरे

धरने को 4160 दिन पूरे होने पर शुक्रवार को श्रमिकों ने जयपुर में स्टेशन रोड पर सभा की। श्रमिक संघ की ओर से कहा गया कि राजस्थान की राजधानी जयपुर में फैक्ट्री से निकाले गए बेरोजगार मजदूरों को धरना पिछले 12 साल से जारी है। सरकार ध्यान नहीं दे रही।



Read: राजस्थान बीजेपी में अब एक व्यक्ति का राज है, मुख्यमंत्री को हटाएं तो हम पार्टी के साथ: घनश्याम तिवाड़ी
2007 में हुए समझौते की पालना नहीं होने से कारखाना फिर से शुरु नहीं हो सका हैं। उद्योग को ऋण देने वाले बैंकों को रकम का चुकारा कर उद्योग को फिर से चलाया जाए।
- कन्हैया लाल शर्मा, अध्यक्ष मैटल्स एण्ड इलेक्ट्रिकल्स मजदूर संघ



पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने वर्ष 2005 में राज कब्र तक आती है जिंदा लाशे मुद्दा उठाया था। इसके बाद श्रमिकों को उनका बकाया वेतन का भुगतान किया गया। सरकार ने जीनव पावर कम्पनी के साथ एमओयू किया। कम्पनी ने 6 करोड़ रुपए श्रमिकों को बांटे। बैंकों की बकाया का चुकारा नहीं होने से मामला फिर अटक गया है।



Read: राजस्थान में मेटल उद्योग बंद होने के बाद यहां श्रमिकों के धरने को 12 साल पूरे, 10 आत्महत्या हुईं, सरकार है चुप

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned