मां, जिसने होद में डुबोकर मारी 4 महीने की मासूम, उसने बचने के लिए सुनाईं पुलिस को ये कहानियां

Jaipur, Rajasthan, India
मां, जिसने होद में डुबोकर मारी 4 महीने की मासूम, उसने बचने के लिए सुनाईं पुलिस को ये कहानियां

पड़ताल में महिला के कथन संदेहास्पद होने पर उसे थाने लाया गया। वहां पूछा कि बेटा भी तो है, उसे ऊपरी हवाओं ने क्यों कुछ नहीं किया? जिसके बाद उसने कहा कि दूसरी औरत आई, जो बच्ची को उठा ले गई। लेकिन असल में ऐसा कुछ नहीं था...

दो दिन पहले मासूम को पानी के होद में फेंक कर मौत के घाट उतारने का क्रूर कदम किसी ने और ने नहीं उसे जन्म देने वाली महिला ने ही उठाया था। अंधविश्वासी महिला टोने टोटके करती थी। उसे खुद में देवी आने का वहम था। जब गुरुवार  को वह पकड़ी गई, तो पुलिस को कई कहानियां सुनाईं, लेकिन पुलिस ने एक नहीं मानीं। अब वह लंबी सजा भुगतेगी....



इस तरह निकले महिला के कथन संदेहास्पद

पुलिस ने पत्रिका संवाददाता से बातचीत में कहा कि आरोपित महिला खुद अंधविश्वासी है। वो टोने-टोटके करती। लोगों को बेवकूफ बनाने में मजा आता था। अपनी 4 माह की मासूम को मारने के बाद भी उसने ऐसी-ऐसी बातें सिपाहियों को सुनाईं, जिन्हें एकबारगी आमजन सही मान लें। मगर, संदेहास्पद थीं, इसलिए पुलिस ने बिना देर किए उसे अरेस्ट कर लिया। कुछ सवाल पूछते ही उसने कहा कि एक औरत आई थी मेरी बच्ची के पास, जो उठा ले गई। मैं भी गई। जबकि, लोगों ने कहा कि कोई औरत वहां नहीं आई थी।



उसके पांच साल का बेटा भी है, उसे क्यों नहीं ले गई भूतनी?

पड़ताल में महिला के कथन संदेहास्पद होने पर उसे थाने लाया गया। वहां पूछा कि बेटा भी तो है, उसे ऊपरी हवाओं ने क्यों कुछ नहीं किया? जिसके बाद उसने जुर्म कुबूला। पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे अदालत में पेश किया, जहां से उसे अदालत भेज दिया गया।



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जन्म के चार माह बाद ही मौत का शिकार हुआ अर्पिता प्रताप नगर निवासी महेन्द्र सिंह की इकलौती बेटी थी। उसके पांच साल का बेटा भी है। वह बुधवार सुबह स्कूल गया था। महेन्द्र सिंह किसी काम से घर से बाहर था। उसकी पत्नी पिंकी व अर्पिता ही घर में थे। पड़ोसी गोपाल अपने घर का ताला लगाकर रोज की तरह चाबी महेन्द्र के मकान में रख कर नौकरी पर चला गया। करीब सवा नौ बजे पिंकी ने अर्पितो को गोद में लिया और फिर चाबी से ताला खोलकर गोपाल मीणा के मकान में गई। चार माह से पिंकी जिस संतान को सीने से लगाकर पाल रही थी उसे मौत देने के लिए पानी में फेंक दिया।



आवाज नहीं आए, इसलिए होद का ढक्कन भी बंद किया
बेटी को पानी में फेंकने के बाद उसने होद का ढक्कन बंद किया और चुपचाप अपने घर चली गई तथा पड़ोसी के दरवाजे की चाबी अपने घर में यथावत स्थान पर रख दी। जल्दबाजी में वह ताला बंद करना भूल गई। इसके बाद खुद ने पति को फोन कर बेटी के अपहरण की कहानी रची।



वहम था कि उसमें देवी आती है

पुलिस जब मौके पर आई तो कहा कि एक महिला बच्ची को छीन ले गई। महिला के वहां आने की किसी ने पुष्टि नहीं की। आस-पास तलाश के बाद अर्पिता पड़ोसी के होद में मृत मिली। पड़ोसी से पूछा तो उसने बताया कि बच्चे दोपहर में आते हैं, उनके लिए चाबी महेन्द्र के मकान पर छोड़ जाता हूं। जबकि पुलिस को ताला खुला मिला। इन तथ्यों पर महिला से पूछताछ हुई तो वह टूट गई और वारदात कबूल कर ली। पति ने पुलिस को बताया कि पिंकी टोने टोटके करती थी। उसे वहम था कि उसमें देवी आती है। वह कई बार कहती थी कि अर्पिता बचेगी नहीं। उसकी उम्र कम है। पति ने उसे कुछ दिन पहले किसी ओझा को भी दिखवाया था।



किसी ने ठीक सलाह दी होती तो अर्पिता जिंदा होती

अर्पिता के साथ जो हुआ वह हर किसी के लिए झकझोर देने वाली घटना है, लेकिन जो कारण सामने आ रहा है वह नया नहीं है। शिक्षा के प्रसार के बाद भी देवी देवता की छाया, शरीर में देवी आना ऐसा अंधविश्वास आज भी कायम है। पिंकी की हरकते देख परिवारजन चिकित्सक की सलाह लेने के बजाय उसे ओझा के पास ले गए। पिंकी व महेन्द्र को किसी ने सही सलाह दी होती तो आज मासूम अर्पिता जिंदा होती।



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