सोनिया के दामाद रॉबर्ट वाड्रा द्वारा खरीद-फरोख्त मामले में देशभर में सुर्खियों में आई ये जमीन, अब खुला...

Jaipur, Rajasthan, India
सोनिया के दामाद रॉबर्ट वाड्रा द्वारा खरीद-फरोख्त मामले में देशभर में सुर्खियों में आई ये जमीन, अब खुला...

न्यास के पास महाराष्ट्र सरकार का पत्र पहुंचा तब कंपनी की साजिश का खुलासा हुआ। फर्म के मालिकों ने बड़ी चतुराई से जमीन के कागजात महाराष्ट्र सरकार के बैंक के पास रखकर मोडगेज के तहत 600 करोड़ रुपए से अधिक का लोन उठा लिया। और फिर..

कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा जमीन खरीद-फरोख्त मामले में राजस्थान के बीकानेर की 500 हैक्टेयर भूमि पर करोड़ों का खेल हुआ था। यह जमीन एक बार फिर चर्चा में है। दिल्ली की एक फर्म यहां की धोरों वाली अनुपयोगी जमीन खरीदकर उस पर गोल्फ कोर्स बनाने के नाम पर करोड़ों रुपए का ऋण लेकर चपत हुई है।



यह ऋण महाराष्ट्र सरकार के एक बैंक से लिया था। एेसे में महाराष्ट्र सरकार ने जमीन कुर्क कर यूआईटी बीकानेर को जमीन बेचने का ऑफर दिया है। संवाद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली की एक फर्म ने पांच साल पहले बीकानेर से करीब बीस किलोमीटर दूर कानासर की रोही में 500 हैक्टेयर जमीन को खरीदा। एक दर्जन से अधिक खातेदारों के नाम चढ़ी इस जमीन को कंपनी ने खरीद करते समय सीलिंग सीमा से बचने के लिए फर्म के कई हिस्सेदार दिखाए।



फर्म ने इस जमीन की तहसील से रजिस्ट्री करवा ली गई। पांच साल पहले यह सब खेल चला और जमीन को नगर विकास न्यास बीकानेर से फ्री कंवर्जन करवाने के लिए सरकार की गोल्फ कोर्स स्कीम के तहत आवेदन किया गया। इस स्कीम में कंवर्जन शुल्क नहीं लिया जाता है।



600 करोड़ रुपए से अधिक का लोन
वहीं, एक रिपोर्ट के मुताबिक, जयश्री बाबा नामक इस फर्म के मालिकों ने बड़ी चतुराई से जमीन के कागजात महाराष्ट्र सरकार के बैंक के पास रखकर मोडगेज के तहत 600 करोड़ रुपए से अधिक का लोन उठा लिया। दूसरी तरफ यूआईटी को जब पता चला कि जमीन सीलिंग सीमा में है और गोल्फ कोर्स स्कीम के तहत पात्र नहीं हो तो कन्वर्जन रद्द कर दिया।



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फर्म ने बैंक को ऋण की राशि नहीं लौटाई तो मामला महाराष्ट्र सरकार के पास पहुंचा। तब महाराष्ट्र सरकार ने जमीन कुर्की की कार्रवाई कर बीकानेर नगर विकास न्यास और हाउसिंग बोर्ड को पत्र ोजकर बेचने का ऑफर दिया है।



पत्र मिलने पर हुआ खुलासा

न्यास के पास महाराष्ट्र सरकार का पत्र पहुंचा तब कंपनी की साजिश का खुलासा हुआ। न्यास के अधिकारियों ने जिला कलक्टर के माध्यम से वापस महाराष्ट्र सरकार को भेजे जवाब में कहा कि इस जमीन का कंवर्जन यूआईटी पहले ही रद्द कर चुकी है।



बीकानेर-जैसलमेर बाइपास के पास जमीन

विवादित जमीन कानासर के चक गर्बी में है। करीब 500 एकड़ ाूमि को महाराष्ट्र के एनपीएम मामलों को दे ाने वाले न्यायालय ने नीलाम करने के आदेश दिए हैं।



तथ्य छुपाकर महाराष्ट्र में फर्म ने उठाया ऋण

यूआईटी के पास महाराष्ट्र सरकार की ओर से एक पत्र आया था कि जिसमें यूआईटी क्षेत्र में जमीन बेचने का ऑफर दिया गया। जमीन की ब्योरा लेने पर पता चला कि यह वही विवादित जमीन है जिसका केस रेवन्यू बोर्ड में चल रहा है और रेवन्यू बोर्ड ने सिवाय चक घोषित कर जमीन वापस ाातेदारों के नाम चढ़वा दी थी।



महाराष्ट्र से लोन उठाने वाली फर्म ने इस तथ्य को छुपाकर यूआईटी से वर्ष 2013 में 90 बी यानी कंवर्जन की कार्रवाई करवा ली थी। बाद में पता चलने पर न्यास ने इसे रद्द कर दिया था। इस संबंध में एसीबी ाी परिवाद दर्ज कर अनसुंधान कर रही है। विस्तृत नोट बनाकर जिला कलक्टर को भेजा गया है।
- नरेन्द्र सिंह, सचिव यूआईटी बीकानेर, राजस्थान।



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