किसान कैसे बनेगा नई तकनीकी का जानकार !

Jaisalmer, Rajasthan, India
किसान कैसे बनेगा नई तकनीकी का जानकार !

-कृषि विज्ञान केन्द्र में वैज्ञानिकों के अधिकांश पद रिक्त-चौकीदार के ‘जिम्मे’ नजर आया केंद्र


जैसलमेर. जैसलमेर मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर जोधपुर रोड पर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र। दिन के करीब डेढ़ बजे, वहां एकमात्र चौकीदार करीब 80 हैक्टेयर में फैले परिसर की रखवाली करता नजर आया। मौके पर पहुंची पत्रिका टीम ने पड़ताल की तो पाया कि मुख्य वैज्ञानिक किसी सेमीनार के सिलसिले में गुजरात गए हुए हैं और एकमात्र विषय विशेषज्ञ किसी बैठक में भाग लेने जयपुर हैं। केन्द्र में दो लिपिक कार्यरत हैं, जिनमें से एक बीमार होने के कारण अवकाश पर है तो दूसरा किसी अन्य कारण से छुट्टी पर है। केंद्र के सभी कमरों पर मोटे-मोटे ताले लटक रहे हैं। गलियारों में अब तक केंद्र की ओर से चलाए गए कार्यक्रमों की फोटो किसी प्रदर्शनी की शक्ल में लगाए हुए हैं, जो अतीत में केंद्र की सक्रियता की कहानी सुनाते हैं। वर्तमान में हालात एकदम विपरीत हैं।
‘घर’ को गए विशेषज्ञ 
स्वामी केषवानंद कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के अंतर्गत संचालित जैसलमेर कृषि विज्ञान केन्द्र में मौजूदा समय में आधा दर्जन विषय विषेषज्ञों के स्थान पर एकमात्र उद्यानिकी का विशेषज्ञ ही कार्यरत है। गत एक वर्ष के दौरान अन्य विशेषज्ञ अपने-अपने गृह क्षेत्र अथवा उसके आसपास स्थानांतरण करवाकर यहां से विदा हो गए। उनकी जगह पर सरकार ने विषेषज्ञों को नहीं लगाया, जिसके कारण केन्द्र की सेवाएं सिमट गई हैं। 
अहम जिम्मेदारियां
कृषि विज्ञान केंद्र के जिम्मे प्रमुख तौर पर क्षेत्र के किसानों को नई तकनीकी से अवगत करवाना है और उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षित करना है। इसके लिए केन्द्र को संस्थागत और असंस्थागत शिविर लगाने होते हैं। जब केन्द्र के पास जरूरी स्टाफ  ही नहीं हैं तब उसकी गतिविधियां सुचारू ढंग से चलवाना संभव नहीं दिखता। जानकारी के अनुसार उच्च स्तर से मिलने वाले लक्ष्यों की पूर्ति के लिए काजरी और अन्य केंद्रों व विभागों से सहयोग लेकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
मौजूदा समय में यह है स्थिति
केन्द्र में फिलहाल एक मुख्य वैज्ञानिक और प्रभारी कार्यरत हैं, जिनके पास पोकरण केंद्र का भी अतिरिक्त कार्यभार है। वे मुख्यालय पर कम ही समय नजर आते हैं। तकनीकी विषेषज्ञों और स्टाफ में 16 के स्थान पर 4 जने कार्यरत हैं। एक वरिष्ठ लिपिक और एक कम्प्यूटर ऑपरेटर कम कनिष्ठ लिपिक कार्यरत है। चतुर्थ श्रेणी के दो कर्मचारी हैं। जिनके कंधों पर लम्बे-चौड़े क्षेत्रफल में फैले केंद्र की देखभाल व सुरक्षा की जिम्मेदारी है। हाइ-वे पर स्थापित होने के कारण यहां लाखों-करोड़ों रुपए की सरकारी सम्पत्ति की सुरक्षा बड़ा मसला है, जबकि केंद्र पर सीसी टीवी कैमरे तक नहीं लगे हैं। केन्द्र व्यवस्थाओं पर प्रभारी अधिकारी से दूरभाष पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया।

फैक्ट फाइल- 
-1992 में जैसलमेर में स्थापित किया गया कृृषि विज्ञान केन्द्र
-25 फीसदी तकनीकी स्टाफ ही कार्यरत
-03 किमी दूर है केंद्र जैसलमेर मुख्यालय से 

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