Jaisalmer ka sonaar- बाबूजी जरा धीरे, बड़ी फिसलन है इस राह पर...

Jaisalmer, Rajasthan, India
Jaisalmer ka sonaar- बाबूजी जरा धीरे, बड़ी फिसलन है इस राह  पर...

-घाटी की चिकनाहट आवागमन पर पड़ रही भारी, जिम्मेदारों को नहीं परवाह

जैसलमेर. स्वर्णनगरी की सुनहरी आभा जहां सात समंदर पार से सैलानियों को आकर्षित कर रही है, वहीं सोनार दुर्ग की सैर के लिए लगाए गए स्वर्ण  पत्थरों की चिकनाहट आमजन के साथ सैलानियों के जीवन के लिए खतरा बनी हुई है। बावजूद इसके जिम्मेदारों को कोई परवाह नहीं है। जानकारों की माने तो सोनार दुर्ग में प्रतिदिन दस हजार से अधिक लोगों का आवागमन होता है, पर्यटन सीजन के समय ये आंकड़ा 50 हजार को भी पार कर जाता है, लेकिन बावजूद इसके दुर्ग तक पहुंचने के लिए बनी घाटी पर लगे पत्थरों को लंबे समय से खुरदरा नहीं किया गया है।  ऐसे में पत्थरों में चिकनाहट आ गई है, जो हादसे का कारण बन सकता है। हालात यह है कि घाटी की चिकनाहट पर फिसलन बढ़ गई है, जिससे राहगीर व वाहन फिसलने लगे है। अब बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में हादसे की आशंका अधिक बढ़ जाएगी।  प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो घाटी में बढ़ी फिसलने से आए दिन कोई ना कोई  घायल हो रहा है।  सोनार दुर्ग भ्रमण के लिए आ रहे सैलानियों को भी भारी दिक्कत होती है और उनके लिए सोनार की इस घाटी को पार करना मुश्किल भरा साबित हो जाता है। 
रपट रहे वाहन
चिकनी घाटियों से पैदल राहगीर के साथ वाहन भी फिसलने लगे है। जानकारों के अनुसार वाहनों के आवागमन के दौरान चालक की ओर से अचानक ब्रेक लगाने के साथ ही  वाहन फिसल रहे है। घाटी से नीचे उतरते समय हादसे की आशंका अधिक रहती है। इस समय ढलान से वाहनों के ब्रेक कमजारे पड़ जाते है। जानकारों के अनुसार सोनार दुर्ग की घाटी के किनारों पर लगे पत्थर क्षतिग्रसत होने से भी दुविधा बढ़ी है। उनके अनुसार लगातार दर्जनों दाबडिय़ों के क्षतिग्रसत होने और कई स्थानों से टूटकर गिरने से हादसे की आशंका है। 

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