आसाराम मामले की सुनवाई जेल में करने की याचिका पर जवाब तलब

Jodhpur, Rajasthan, India
आसाराम मामले की सुनवाई जेल में करने की याचिका पर जवाब तलब

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ के मामले की सुनवाई सेशन न्यायालय के बजाय सेंट्रल जेल में करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी आसाराम व उनके सहयोगी आरोपियों को तीन जनवरी तक जवाब पेश करने के लिए कहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीडऩ के मामले की सुनवाई सेशन न्यायालय के बजाय सेंट्रल जेल में करने को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आरोपी आसाराम व उनके सहयोगी आरोपियों को तीन जनवरी तक जवाब पेश करने के लिए कहा है। राज्य सरकार व पुलिस ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका पेश करते हुए आसाराम मामले की नियमित सुनवाई सेशन न्यायालय (जोधपुर जिला) की बजाय सेंट्रल जेल में ही करने की गुहार की गई थी। 

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वरिष्ठ न्यायाधीश गोविन्द माथुर व न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की खण्डपीठ ने मंगलवार को सुनवाई करते हुए मौखिक रूप से कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में बयानबाजी ना करने के निर्देश होने के बाद भी आसाराम हर बार पेशी पर आने के दौरान बयानबाजी क्यों कर रहा है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए सभी आरोपियों से जवाब तलब किया था। नोटिस तामिल होने के बाद मंगलवार को बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता कोर्ट में पेश हुए और जवाब के लिए समय मांगा।

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हाईकोर्ट ने किया था पाबंद

गौरतलब है कि पूर्व में आसाराम मामले की सहआरोपी संचिता उर्फ शिल्पी की ओर से दायर याचिका को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने आसाराम मामले की सुनवाई सेशन न्यायालय में ही करने के आदेश दिए थे। सुरक्षा कारणों के चलते 3 अगस्त, 2015 को हाईकोर्ट प्रशासन ने एक नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई सेंट्रल जेल में ही करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद हाईकोर्ट प्रशासन के आदेशों को खण्डपीठ में चुनौती दी गई थी। जिस पर हाईकोर्ट ने 14 सितम्बर, 2015 को कुछ निर्देशों के साथ सुनवाई को दुबारा सेशन न्यायालय में करने के आदेश दिए थे। साथ ही निर्देश दिए थे कि आसाराम व उसके समर्थक किसी प्रकार का रास्ते में व्यवधान नहीं करेंगे।

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सुरक्षा कारणों से फिर लगाई याचिका

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सुनवाई सेशन न्यायालय में शुरू की गई, लेकिन आसाराम के समर्थक कोर्ट परिसर के बाहर हंगामा कर रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा कारणों, आसाराम की स्वयं की सुरक्षा एवं आम नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए हाईकोर्ट में दुबारा याचिका लगाकर सुनवाई को शिफ्ट करने की गुहार की थी। सरकार की ओर से राजकीय अधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने कहा कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आसाराम हर बार मीडिया के समक्ष बयानबाजी कर रहा है। साथ ही कोर्ट परिसर के बाहर आसाराम समर्थकों का जमवाड़ा रहता है। जिससे अनहोनी का खतरा रहता है। इस पर हाईकोर्ट ने तीन जनवरी को जवाब पेश करने के लिए कहा है।

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