बीएसएफ सैनिक अब दुश्मनों से नहीं लेंगे लोहा, ये है बड़ी वजह

Jodhpur, Rajasthan, India
बीएसएफ सैनिक अब दुश्मनों से नहीं लेंगे लोहा, ये है बड़ी वजह

देश की सीमा पर चौबीस घंटे सर्तकता बरतने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए अब दुश्मनों से लोहा लेने से पहले इन दुश्मनों से जंग में दो-चार होना होगा। इस खबर में जानिए क्या है इसकी बड़ी वजह

भारत और पाकिस्तान के लिए टिड्डी के आउटब्रेक का मौसम अब शुरू हो गया है, जो नवम्बर माह तक रहेगा। दोनों देशों में खाड़ी देशों की तरफ टिड्डी हमले की अधिक आशंका रहती है। एेसे में भारत में राजस्थान और गुजरात राज्यों में टिड्डी को लेकर सघन सर्वे शुरू कर दिया गया है। बोर्डर एरिया पर टिड्डी के अधिक खतरे को देखते हुए टिड्डी चेतावनी संगठन इस बार बोर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) के साथ मिलकर निगरानी करेगा। बीएसएफ के जवान टिड्डी संगठन के कार्मिक व वैज्ञानिकों के साथ बोर्डर पर निगाहें रखेंगे, ताकि किसी आपदा को रोका जा सके।


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भारत में टिड्डी चेतावनी संगठन का मुख्यालय जोधपुर में है, जहां से पूरे देश में टिड्डी हमले पर नजर रखी जाती है। टिड्डी यानी डेजर्ट लोकस्ट अफ्रीका व खाड़ी देशों के मरुस्थल के साथ भारत व पाक सीमा पर स्थित थार मरुस्थल में पाई जाती है। फसल नहीं होने पर यह सोलिटेरी फॉर्म यानी एकाकी जीवन व्यतीत करती है, जो खतरनाक नहीं होता है। मानसून के समय अनुकूल परिस्थिति होने पर गोरजियस फॉर्म यानी सामूहिक गतिविधि करने लगती है, तब यह करोड़ों के झुण्ड के रूप में एक स्थान से दूसरे स्थान पर उड़कर फसलें चौपट करती है। भारत में जून से लेकर नवम्बर का महीना टिड्डी आउटब्रेक का माना जाता है।


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यमन से खतरा अधिक


संयुक्त राष्ट्र संघ के विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार वर्तमान में अफ्रीकी देशों मोंटेनिया, मोरक्को, अलजीरिया में टिड्डी के सामान्य दल देखे गए हैं। सउदी अरब, ईरान सहित खाड़ी देशों में भी डेजर्ट लोकस्ट रिपोर्ट की गई है, लेकिन यमन में घरेलू राजनीतिक संकट के कारण वहां एफएओ अपना सर्वे नहीं कर पाई है, जिससे यमन की स्थिति को लेकर एफएओ के पास कोई आंकड़ा नहीं है। पिछले साल यमन से ही टिड्डी का आउटब्रेक हुआ था जो पाकिस्तान व भारत की तरफ बढ़ी। पाकिस्तान पहुंचने से कुछ समय पहले हवा की दिशा बदलने से टिड्डियां लालसागर की तरफ मुड़ गई फिर भी पाकिस्तान को ब्लूचिस्तान के बड़े प्रांत पर टिड्डियों के खिलाफ ऑपरेशन करना पड़ा था।


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सघन सर्वे कर रहे हैं


वर्तमान में हम अपने सभी 11 केंद्रों पर सघन सर्वे कर रहे हैं। जून महीने में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर भी सर्वे किया जाएगा। इसके लिए बीएसएफ की मदद ली जाएगी। टिड्डी हमले को लेकर हम पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ भी सम्पर्क में है।


-डॉ. एसके वर्मा, उप निदेशक, टिड्डी चेतावनी संगठन

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