जोधपुर में पिछली चार योजनाओं का ये हश्र, जेडीए ने फिर लॉन्च कर दी तीन और नई योजनाएं

Jodhpur, Rajasthan, India
जोधपुर में पिछली चार योजनाओं का ये हश्र, जेडीए ने फिर लॉन्च कर दी तीन और नई योजनाएं

पिछले दो साल में जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) चार आवासीय योजनाएं लॉन्च कर चुका है। अब फिर से मंगलवार को तीन नई योजनाएं लॉन्च कर दी गई। देखा जाए तो पिछले दो साल और इससे पहले भी जेडीए की ओर से लाई गई अधिकतर योजनाओं में आवंटी आज तक पूरी तरह बस नहीं पाए हैं।

पिछले दो साल में जोधपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) चार आवासीय योजनाएं लॉन्च कर चुका है। अब फिर से मंगलवार को तीन नई योजनाएं लॉन्च कर दी गई। देखा जाए तो पिछले दो साल और इससे पहले भी जेडीए की ओर से लाई गई अधिकतर योजनाओं में आवंटी आज तक पूरी तरह बस नहीं पाए हैं। कारण, जेडीए ने अपने योजना क्षेत्रों पर ध्यान ही नहीं दिया, बल्कि योजनाओं के नाम पर जेडीए का खजाना तो भर गया, लेकिन आमजन को पूरा लाभ नहीं मिला। अब देखना यह है आगामी दिनों में जेडीए योजनाओं से होने वाली आय की कितनी राशि योजनाओं के विकास पर खर्च करता है या फिर योजनाओं में आवंटी भूखंड के नाम पर ठगा सा महसूस करेंगे।




पिछली चार योजनाओं का हश्र


मंडलनाथ और विज्ञाननगर आवासीय योजना

ये दोनों योजनाएं 22 मई 2015 को लॉन्च की गई। इसके बाद दोनों योजनाओं की लॉटरी सितम्बर में निकाली गई। दो साल बाद भी इन योजनाओं में जेडीए ने विकास का कोई कार्य नहीं करवा पाया। सिर्फ योजना का गेट और मुटाम लगाकर छोड़ दिए गए। योजना क्षेत्र की जमीन पथरीली और ऊबड़-खाबड़ होने और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण आवंटी वहां बसने से कतरा रहे हैं।






अरना विहार आवासीय योजना

अरणा-झरना रमणीक तीर्थस्थल के समीप अरणा विहार आवासीय योजना की लॉन्चिंग 24 नवंबर 2016 को की गई। जोधपुर-जैसलमेर के 200 फीट हाईवे पर बड़ली के खसरा नंबर 88 में यह योजना करीब 72 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में लॉन्च हुई। जेडीए का खजाना तो भर गया, लेकिन यहां से होने वाली आय का पैसा योजना के विकास पर खर्च नहीं किया, इसलिए यहां भी आवंटी बसने से कतरा रहे हैं। हालांकि योजना में सीवर और सड़क के कार्य फिलहाल चल रहे हैं।




झरना विहार आवासीय योजना

अरणा विहार के बाद और इसी योजना के पास लॉन्च की गई। इस योजना में भी विकास के नाम पर कुछ दिखाई नहीं देता। भूल से कोई आवंटी अपना भूखंड देखने पहुंच जाए, तो उसे योजना ही नहीं मिले। इन दो योजनाओं के मुख्य द्वार तक नहीं बने हैं। हालांकि जेडीए यहां सड़क और सीवरेज के कार्य होने का दावा कर रहा है, लेकिन ये दोनों कार्य धरातल पर नजर नहीं आ रहे। यहां पथरीली भूमि पर मुटाम लगाकर छोड़ दिए हैं।






अन्य योजनाओं का भी यही हाल

जोधपुर विकास प्राधिकरण की अन्य योजनाओं का भी यही हाल है। 2008 में आई सुंदरसिंह भंडारी नगर योजना में आवंटियों के लिए बमुश्किल हाल ही बिजली-पानी के कुछ कार्य हुए हैं, लेकिन सीवर लाइन का अभाव है। मुटाम की बनी सड़कें जगह-जगह से खुदी और ऊबड़-खाबड़ हैं। इसके चलते नौ साल बाद भी योजना में आवंटी पूरी तरह नहीं बसे। यही हाल 2009-10 में आई आवासीय योजना राजीव गांधी नगर और 2011 में आई विवेक विहार योजना का है।





विकास पर खर्च करेंगे पैसा

हम योजनाओं के विकास पर पैसा खर्च करेंगे। अभी जो योजनाएं लॉन्च की जा रही हैं। इनसे होने वाली एक निश्चित राशि योजनाओं के डवलप के लिए रखी जाएगी। लॉन्च हुई दो योजनाएं छोटी-छोटी हैं। इनको डवलप करना आसान है। विकास को ध्यान में रखते हुए ही छोटी और शहर के पास स्कीमें लॉन्च की गई है। फिलहाल लॉन्च हुई योजना में अगस्त तक लॉटरी निकाल देंगे। पुरानी जितनी भी योजनाएं हैं। उनके विकास के लिए प्लान बना रखा है। कृषि मंडी, हाउसिंग बोर्ड से पैसा आना है, एचपीसीएल और आईओसी सहित अन्य जगह से भी राशि आनी है। इस राशि से योजनाओं का विकास किया जाएगा।

दुर्गेश बिस्सा, आयुक्त, जोधपुर विकास प्राधिकरण

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