दिल से दिल की गुफ़्तगू है गज़़ल, काव्य संग्रह दस्तक का विमोचन

Harshwardhan Bhati

Publish: Nov, 21 2016 09:06:00 (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India
दिल से दिल की गुफ़्तगू है गज़़ल, काव्य संग्रह दस्तक का विमोचन

शाइर दिलीप केसानी के सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह दस्तक का रविवार को चंद्रा इन सभागार में विमोचन समारोह आयोजित किया गया। शीर्ष पत्रकार व कवि सुधीर सक्सेना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। राजस्थान पत्रिका जोधपुर संस्करण के संपादकीय प्रभारी ज्ञानेश उपाध्याय मुख्य अतिथि थे।

अच्छा है दिल के पास रहे पासबाने-अक़्ल, लेकिन कभी-कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे। प्रख्यात शीर्ष पत्रकार व कवि सुधीर सक्सेना ने अल्लामा इक़बाल का यह शेर उद्धृत करते हुए कहा कि जब तक दिल को खुला नहीं छोड़ेंगे, तब तक अच्छी कविता नहीं होगी। 
पुस्तक का विमोचन

वे खुशदिलाने जोधपुर की मेज़़बानी में रविवार को चंद्रा इन सभागार में आयोजित शाइर दिलीप केसानी के सद्य प्रकाशित गज़़ल संग्रह दस्तक के विमोचन समारोह में अध्यक्षीय उद्बोधन दे रहे थे। इस मौके अतिथियों ने पुस्तक का विमोचन किया।

गज़़ल का चित्त से ताल्लुक़
उन्होंने कहा कि कविता और गज़़ल का चित्त से ताल्लुक़ है। दिल से दिल की गुफ़्तगू गज़़ल है। साहित्य की कोई सरहद नहीं होती, वह स्थानीयता से खुराक लेकर आसमान तक परचम लहराता है। धूमिल ने एक जगह कहा है कि कविता भाषा में आदमी होने की तमीज़़
है और दूसरी जगह वे कहते हैं कि कविता समूचा आदमी चाहती है अपनी खुराक के लिए। इसलिए साहित्य में आपको अपना समूचा उंडेलना पड़ता है।

केसानी में कविता लिखने का शऊर
सक्सेना ने कहा कि दुष्यंत ने गज़़ल को पूरी रवानी दी। दिलीप केसानी में कविता लिखने का शऊर है, यह कितना बढ़ता है, यह उनके समर्पण पर निर्भर करेगा। वे निजी प्रसंगों से निकल कर उड़ान भरें। यह सारा आकाश तुम्हारा है।

लोग बाजार से नहीं, दिल की मानें
मुख्य अतिथि राजस्थान पत्रिका के संपादकीय प्रभारी ज्ञानेश उपाध्याय ने कहा कि आज पूरे बाजार में शोर बहुत है। लोग बाजार से नहीं, दिल की मानें।
 
शब्द की साधना बहुत कठिन
विशिष्ट अतिथि कवि व आकाशवाणी के कार्यक्रम अधिशासी रविदत्त मोहता ने कहा कि शब्द की साधना बहुत कठिन साधना है, जो साधना गुफाओं से मिलती है उससे सिद्धि जल्दी मिलती है, लेकिन भीड़ में साधना करने वालों को सिद्धि मुश्किल से मिलती है।

कविताएं काबिले-तारीफ़
विशिष्ट अतिथि नगर निगम में प्रतिपक्ष के पूर्व नेता गणेश बिजाणी ने कहा कि दिलीप की कविताएं काबिले-तारीफ़ हैं। संस्था अध्यक्ष संदीप भांडावत ने कहा कि दिलीप केसानी साहित्य में उभरते नक्षत्र की तरह छा जाएं।

गज़़लों का  गुलदस्ता
इस मौके दिलीप केसानी ने गज़़लें पेश की और कुलदीप माथुर ने तरन्नुम में गज़़ल सुनाई। कार्यक्रम में मनशाह नायक ने पत्रवाचन किया। वहीं परमानंद केसानी ने विचार व्यक्त किए। अंत में अनिल अनवर ने आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. साजिद निसार ने किया।

कई कलाधर्मी मौजूद थे
इस मौके दिल्ली के चित्रकार प्रफुल्ल देसाई,साहित्यकार डॉ.रमाकांत शर्मा, डॉ. हरीदास व्यास, मीठेश निर्मोही, इश्राकुल इस्लाम माहिर, अशोक सुथार, हरिप्रकाश राठी, तहज़ीब संस्था के नफासत अहमद व संगीत संकलनकार गिरधारीलाल विश्वकर्मा आदि मौजूद थे।

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