नशे की गिरफ्त से निकलकर अब लोगों से छुड़वा रहे नशा

Jodhpur, Rajasthan, India
नशे की गिरफ्त से निकलकर अब लोगों से छुड़वा रहे नशा

अब तक 200 लोगों को करवा चुके हैं नशामुक्त

 नशे ने जब सपनों को चकनाचूर कर दिया तो नशा छोडऩे की ठानी ओर कुछ माह के प्रयास के बाद नशे से मुक्ति पा ली। नशे की लत का दर्द महसूस किया था ।



 इसलिए नशे की गिरफ्त में फंसे लोगों को भी नशामुक्त करने की ठानी और नशामुक्ति केन्द्र की स्थापना कर अब तक 200 लोगों को नशामुक्त करा चुके हैं।यह कहानी है शहर के झालमंड क्षेत्र में नशामुक्ति केन्द्र संचालित करने वाले 30 वर्षीय युवा महेन्द्र राहड़ की।



आज स्कूल लाइफ से निकलकर कॉलेज की दहलीज पर आए युवाओं को नशे ने अपनी बेडिय़ों में जकडऩे के प्रयास किए हैं। ऐसे में लोगों को सफल सेवा एवं नशामुक्ति संस्थान के माध्यम से नशा छुड़वाने का प्रयास कर रहे हैं महेन्द्र राहड़। 



जन सहयोग से चलने वाले इस संस्थान में आज भी करीब दो दर्जन लोग नशा छोडऩे के लिए प्रयासरत हैं। संस्थान में हर वर्ग के व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के रहते है और हर प्रकार के तीज-त्यौंहार मनाते हैं। महेन्द्र के अनुसार संस्थान से नशा छोड़ चुके व्यक्ति वापस आकर यहां अपनी सेवाएं भी देते हैं। 



इसके अतिरिक्त नशा छोडऩे वालों के सम्मान के साथ ही उनके रोजगार के लिए भी वे प्रयास करते हैं। संस्थान में महेन्द्र राहड़ के साथ ही महेन्द्र गोयत और मुकेश चौधरी भी अपनी सेवाएं संस्थान को दे रहे हैं।



...दस साल हो गए बर्बाद



संस्थान चलाने वाले महेन्द्र राहड़ बताते है कि 12 वीं सांइस मैथ्स से करने के बाद आईआईटी कर इंजिनियर बनने का ख्वाब था, लेकिन इसी बीच गलत संगत से नशे की लत में पड़ गया। जिंदगीं के अनमोल 10 साल नशे की गिरफ्त में बर्बाद कर दिए।



 महेन्द्र सिर पर लगी चोटों को दिखाते हुए कहते है कि नशे की हालत में गाड़ी चलाते हुए दुर्घटना का शिकार भी हुए। नशा करने के दौरान ही एक बार खुदकुशी करने का प्रयास भी किया लेकिन घर वालों ने बचा लिया। इसके बाद किसी संस्था से नशा छोड़कर लोगों को नशा छुड़वाने के लिए खुद का नशामुक्ति केन्द्र बनाया।


ये नशा छुड़वाने के किए जाते हैं प्रयास-


अफीम, डोडा, स्मैक, चरस, गांजा, भांग, शराब आदि



दो चरणों में छुड़वाते हैं नशा



पहले चरण में व्यक्ति को शारीरिक रूप से नशे से दूर किया जाता है। इसके अंर्तगत सर्वप्रथम मरीज(नशा करने वाला) का डॉक्टर द्वारा चेकअप व जांचें की जाती हैं, जिसके आधार पर उसे दवाईयां आदि दी जाती हैं।



 इस दौरान उसे डाईट प्लान के अनुसार पौष्टिक भोजन, योग और आराम दिया जाता हैं। इस पूरी प्रक्रिया में व्यक्ति के शारीरिक सक्षम होने में करीब 2 से 3 महिनों का समय लग जाता हैं।



 

दूसरे चरण में व्यक्ति को मानसिक रूप से तैयार किया जाता हैं ताकि वह वापस नशे की लत में ना फंसें। करीब 1-2 माह में इसके लिए आध्यात्म, ध्यान एवं मनोरंजन के विभिन्न माध्यमों का सहारा लिया जाता हैं। जब व्यक्ति कार्य कुशल होकर घर जाता है, उसके बाद भी संबंधित परिवार से फीडबैक लिया जाता है।




फैक्टर जो तय करते हैं नशा छुड़ाने का समय-


- व्यक्ति की उम्र

- समय (जितने वर्ष नशा किया हो)

- नशे का प्रकार

- नशे के प्रति मानसिक जुड़ाव

- व्यक्ति का पारीवारिक व सामाजिक जीवन

- इनके अलावा अन्य कई तथ्य हैं लेकिन व्यक्ति की मानसिक मजबूती के सामने प्राय: सभी बातें गौण हो जाती हैं।



संस्थान में उपलब्ध सुविधाएं-

- रहनें व खानें-पीने की

- डॉक्टर व दवाईयों की

- आध्यात्म व योगा की

- इनडोर व आउटडोर गेम्स की



मनाते हैं रिकवरी बर्थडे-


महेन्द्र का कहना है कि यहां से नशामुक्त होने वाले का एक साल बाद रिकवरी बर्थडे मनाया जाता है। संबंधित व्यक्ति को संस्थान में बुलाकर उसके हाथों से केक कटवाया जाता है। इस दौरान वे यहां नशामुक्ति व पुर्नवास केन्द्र में रह रहे लोगों को नशे के दौरान, केन्द्र में रहने व नशा छोड़कर सामाजिक जीवन जीनें के अनुभव भी साझा करते हैं।


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