जोधपुर में दिखा रिश्तों का काला सच: पिता का खून ना मैच हुआ तो बुआ ने किडनी देने से किया इंकार

Jodhpur, Rajasthan, India
जोधपुर में दिखा रिश्तों का काला सच: पिता का खून ना मैच हुआ तो बुआ ने किडनी देने से किया इंकार

पिता का खून मैच नहीं कर रहा, तो बुआ किडनी देने को तैयार नहीं, भाई नहीं जुटा पा रहा भाई को बचाने का साहस, जोधपुर में मरीज नहीं होने से शुरू नहीं हो रहा किडनी ट्रांसप्लांट, 100 मरीज है डायलेसिस के लेकिन एक भी पूरी तरीके से योग्य नहीं

यंू कोई जरा भी बीमार हो जाए, तो अपने-पराये सभी यह कहने से नहीं चूकते कि 'हम हर समय तैयार हैं, आधी रात को भी बस फोन कर देना।' कोई भी किसी को अपनी जान से ज्यादा प्यारा बताने में पीछे नहीं रहता, लेकिन उसकी जान बचाने को आगे आने में भी डर रहा है। किसी की जान पर बन आए और मदद की दरकार और हर कोई मुंह छिपाने की कोशिश करने लगे तब सही मायने में पता चलता है कि वास्तव में कौन शुभचिंतक या अपना है। यहां किडनी रोगियों की हालत देखकर तो यही लगता है। रिश्तों-नातों और मानवीय पक्ष की हकीकत को एक्सपोज करती यह खबर-


READ MORE: साढ़े छह माह में जन्मे नवजात शिशु को जोधपुर के इस अस्पताल में मिली जिंदगी, यूं हुआ स्वस्थ


जोधपुर. डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के अधीन संचालित मथुरादास माथुर अस्पताल और महात्मा गांधी अस्पताल में 100 एेसे मरीज हैं, जिनको आज ही किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है, लेकिन इन सौ में से एक मरीज का चुनाव भी डॉक्टरों के लिए चुनौती बना हुआ है। किसी मरीज के परिजन किडनी देने को तैयार है, तो उनकी खून जांच नेगेटिव आ रही। कहीं बुआ अड़ंगा डाल रही है, तो कहीं भाई तक भाई की जान बचाने के लिए 'दर्द' मोल लेने से हिचक रहा है। बाप का खून बेटे को किडनी देने से रोक रहा है। किसी ने अपनी किडनी देने के लिए सोचने के लिए भी इतना समय लिया है कि डॉक्टरों को वार्ड में भर्ती ट्रांसप्लांट मरीज की छुट्टी करनी पड़ रही है। ट्रांसप्लांट के लिए अब तक चार मरीजों को वार्ड में भर्ती किया गया। उन्हें अलग-अलग कारणों से वार्ड से छुट्टी देनी पड़ी। कॉलेज के यूरोलॉजिस्ट प्रिंसिपल डॉ. अमिलाल भाट को इंतजार है कि कोई मरीज आए तो सही, ताकि जयपुर के बाद प्रदेश में दूसरा किडनी ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू किया जा सके।


READ MORE: जोधपुर में इस युवक के लिए जन्म दिन पार्टी मनाना बना खौफनाक, वीडियो में रिकॉर्ड हुई आखिरी छलांग


दो साल पहले मिली थी अनुमति

जोधपुर आए तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने 13 सितम्बर 2015 को मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की सैद्धांतिक सहमति दी थी। इसके बाद जून 2016 में ट्रांसप्लांट तैयारियों को देखने के लिए जयपुर स्थित एमएमएस मेडिकल कॉलेज से स्टेट ऑर्गन ट्रांसप्लांट टीम आई। जिसकी रिपोर्ट के बाद अगले महीने ही डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज में किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति दे दी गई। अब साल भर हो गया है, लेकिन पहले मेडिकल कॉलेज तैयार नहीं था तो अब मरीज तैयार नहीं है।


एक महीने में 800 डायलेसिस प्रोसेस

वर्तमान में एमडीएम अस्पताल में 70 और गांधी अस्पताल में 60 मरीज डायलिसिस के हैं। दोनों अस्पतालों में हर महीने 400-400 डायलिसिस प्रोसेस होते हैं। नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मनीष चतुर्वेदी ने बताया कि करीब 100 मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है, लेकिन अब तक चिकित्सकीय जांच व परिजनों की सहमति पर ही बात अटकी हुई है। यह प्रोसेस हो जाता है तो फिर कानूनी प्रक्रिया होगी और उसके बाद ट्रांसप्लांट।


READ MORE: किसानों व व्यापारियों को होगा लाभ,मथानिया-ओसियां मण्डियों मे होगी इसकी सुविधा


मरीज मिले तो कल ही कर दंू ट्रांसप्लांट

मुझे किडनी ट्रांसप्लांट का अब तक कोई मरीज नहीं मिला है। नेफ्रोलॉजिस्ट मुझे मरीज दे दें तो मैं कल ही ट्रांसप्लांट शुरू कर दूं। डॉ. अमिलाल भाटी, प्रिंसिपल, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज


मुश्किल से तैयार हो रहे परिजन

किडनी देने में सबसे बड़ी परेशानी मरीज के परिजनों का तैयार नहीं होना है। किडनी लेने वाले और देने वाले दोनों चिकित्सकीय जांच में फिट होने चाहिए। हम कोशिश कर रहे हैं। दो मरीज अभी पाइपलाइन में है। इसमें से एक के परिजनों ने किडनी देने के लिए हामी भर ली है। डॉ. मनीष चतुर्वेदी, नेफ्रोलॉजिस्ट, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned