देश में नेचर गाइड बताएंगे गांवों की खूबसूरती, 11 स्थानों में जोधपुर भी शामिल

Jodhpur, Rajasthan, India
देश में नेचर गाइड बताएंगे गांवों की खूबसूरती, 11 स्थानों में जोधपुर भी शामिल

वैज्ञानिकों से सीख कर पर्यटकों नेचर गाइड अपने गांव के जीव-जंतुओं का वैज्ञानिक महत्व बताएंगे। इसके लिए देश के 11 स्थानों का चयन हुआ है, जिसमें जोधपुर भी शामिल हैं।

देश के देहातों के युवा पर्यटन गाइड की तरह कुदरत की खूबसूरती बयां करें तो आपको कैसा लगेगा? केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने स्थानीय क्षेत्र की वनस्पति और जीव-जंतुओं को बचाने के साथ उसमें पर्यटन विकसित करने के लिए गांव के विद्यार्थियों व लोगों को 'नेचर गाइड' बनाने की महती योजना शुरू की है। जोधपुर सहित देश के 11 शहरों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया हैं।


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जोधपुर में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (बीएसआई) के वैज्ञानिकों की टीम ने यह कार्यक्रम शुरू कर दिया है। पहले फेज में जिले के 10 विद्यार्थियों को चुना गया हैं। तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद ये छात्र बायोडायवरसिटी कंजरवेशनिस्ट कहलाएंगे, जो पर्यटन के साथ गांव के लोगों को जैव विविधता का महत्व भी बता सकेंगे।


मंत्रालय ने राष्ट्रीय कौशल विकास योजना की तर्ज पर हरित कौशल योजना शुरू की है। इसका जिम्मा जेडएसआई और बीएसआई के कंधों पर डाला है। जोधपुर में 10 प्रशिक्षणार्थियों का वॉक इन इंटरव्यू के जरिये प्रशिक्षण के लिए चयन किया गया हैं। इसमें चार छात्राएं भी हैं। इनका यह 420 घण्टे का पाठ्यक्रम है। इन्हें तीन महीनों तक प्रतिदिन सात घंटे सैद्धांतिक कक्षाओं के साथ फील्ड विजिट कराई जाएगी। इस दौरान इनको वनस्पति और जंतुओं के बारे में वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन कराया जाएगा। 


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तीन महीने के प्रशिक्षण के बाद ये बायोडायवरसिटी कंजरवेशनिस्ट बनेंगे। इसके बाद प्रशिक्षणार्थियों को वनस्पति या जंतुविज्ञान में से कोई एक विषय चुनना होगा। उसके बाद फिर से तीन महीने का कोर्स होगा। जिसके बाद ये पैरा टेक्सोनॉमिस्ट कहलाएंगे। यह कोर्स पूरी तरह निशुल्क है। पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर सरकार ने जोधपुर के अलावा अण्डमान, सिक्किम, ईटानगर, देहरादून, पुणे, कोयम्बटूर, कोझिकोड, कोलकाता, इलाहाबाद और बेंगलूरु को भी चुना है।


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हम बताएंगे चिंकारे व खेजड़ी का महत्व

वैसे तो पर्यावरण का महत्व सभी जानते हैं, लेकिन लोग उसका आर्थिक महत्व नहीं जानते। हम अद्र्ध शुष्क क्षेत्र में पाए जाने वाले ब्लैक बग, चिंकारा, गोडावण, सांप, चील, खेजड़ी, केर व चंदन सहित क्षेत्र की वनस्पति और जंतुओं का महत्व बताएंगे, जिससे वे जैव विविधता संरक्षण के साथ पर्यटन के क्षेत्र में योगदान दे सकते हैं। एेसे युवा जैव विविधता बोर्ड के सदस्य भी बन पाएंगे।

-डॉ. संजीवकुमार, प्रभारी, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण जोधपुर

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