आज से गूंजेगा 'घुड़ळो घुमैला जी घुमैळा', गणगौरी तीज तक होंगे जगह-जगह आयोजन

Jodhpur, Rajasthan, India
आज से गूंजेगा 'घुड़ळो घुमैला जी घुमैळा', गणगौरी तीज तक होंगे जगह-जगह आयोजन

मारवाड़ में महिलाओं के प्रमुख लोकपर्व गणगौर पूजन के आठवें दिन सोमवार को तीजणियों की ओर से घुड़ला पूजन आरंभ किया जाएगा। आकर्षक पारम्परिक परिधानों में शीतलाष्टमी की शाम तीजणियां अलग अलग समूह के रूप में ढोल-थाली के साथ पवित्र मिट्टी से निर्मित घुड़ला लेने कुम्हार के घर पहुंचेंगी। एक पखवाड़े तक गौरी पूजन करने वाली तीजणियां छिद्रयुक्त घुड़ले में आत्म दर्शन के प्रतीक दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद उसे गवर पूजन स्थल पर विराजित करेंगी। गणगौरी तीज तक सगे-संबंधियों के घर ले जाकर मां गौरी से जुड़े मंगल गीत गाएंगी।


घुड़ले से जुड़ी एेतिहासिक घटना

मारवाड़ के प्राचीन दस्तावेजों व बहियों के अनुसार गवर पूजन के दौरान तीजणियों को उठाकर ले जाने वाले घुड़ले खां का पीछा करते हुए राव सातल ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया था। उसी घुड़ले खां के सिर को लेकर आक्रोशित तीजणियां घर-घर घूमी थी। मारवाड़ में गणगौर पूजन के दौरान चैत्र वदी अष्टमी के दिन इतिहास से जुड़े वाकये को आज भी याद किया जाता है।


READ MORE: मारवाड़ में अनूठी है मां शीतला के प्रति आस्था, कल घर-घर में होगा पूजन


तीज तक घुमेगा घुड़ला

महिलाओं के सामूहिक व्रत और पूजन का उत्सव गणगौर होली के दूसरे दिन से आरंभ हो गया। इस पर्व को जोधपुर में दो अलग-अलग नाम से मनाने की परम्परा चली आ रही है। पहले पखवाड़े में पूजे जाने वाली गणगौर घुड़ला गवर कहलाती है जबकि दूसरे पखवाड़े में धींगा गवर का पूजन होता है। प्रथम पखवाड़े में गवर का पूजन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से आरंभ होकर चैत्र शुक्ल तीज तक किया जाता है। कुंवारी कन्याएं मनोवांछित वर और सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए गवर पूजन और व्रत रखती हैं। उमा बिड़ला, पूर्व अध्यक्ष माहेश्वरी महिला मंडल जोधपुर।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned