गुरु पूर्णिमा से पहले ये कहानी पढ़ जानें कैसा होता है 'असली गुरु'

Jodhpur, Rajasthan, India
गुरु पूर्णिमा से पहले ये कहानी पढ़ जानें कैसा होता है 'असली गुरु'

माना जा सकता है कि वर्तमान में तो अंधे गुरुओं की जमात है, जो ज्यादा से ज्यादा भक्त बटोरने में लगी है। आगामी 9 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है, तो हम आपको बता रहे हैं एक कहानी, जिसे पढ़ आप जान पाएंगे कि गुरु कौन होता है और कैसा होता है...

भगवान बुद्ध जेतवन में प्रवचन दिया करते थे। एक दिन एक भिक्षु ने उनसे पूछा- तथागत यह वातायन में एक पक्षी हर रोज आपके प्रवचन के शुरू होने से कुछ समय पहले ही आकर चुपचाप बैठ जाता है और आपके प्रवचन समाप्त होने तक शांत बैइा रहता है। आपके प्रवचन को ये पक्षी बड़े ध्यान से सुनता है, कृपया बताएं इसका रहस्य क्या है। बुद्ध कुछ देर वातायन में बैठे उस पक्षी को निहारते रहे और फिर बोले, भंते हम जीवन में अहंकारवश या अन्य सांसारिक कार्यों के चलते बहुत सारे ऐसे मौके छोड़ देते हैं, जो हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।


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इसके बाद उन्होंने बताया कि वो पक्षी पिछले जन्म में एक सेठ था और इसी तरह बुद्ध उसके नगर से गुजरते थे। सेठ होने के अहंकार में उसे बुद्ध के चरणों में नमन करने की फुर्सत नहीं थी। लेकिन बुद्ध जानते थे कि उसका अहंकार उससे फुर्सत छीन रहा है।


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यह व्यक्ति बुद्ध को देखने और उन्हें सुनने का मौका चूक गया, लेकिन मरने के बाद जब यह पक्षी बना तो इसकी चेतना में स्मृति शेष रही और यह 'भाव बोध' द्वारा जान गया कि उससे गलत हुआ है। बुद्ध ने कहा कि इसके 'भाव बोध' से इसने चूके हुए मौके को फिर से पा लिया है।


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हमारे जीवन में भी ऐसे बहुत से मौके आते हैं जब हम अपने गुरु को देखने और सुनने में चूक कर जाते हैं, क्योंकि हम किसी अन्य तथाकथित के चक्कर में लगे रहते हैं। यहां ये जान लेना आवश्यक है कि सच्चे गुरु तत्व रूपी भी हो सकते हैं। ये जरूरी नहीं है कि गुरु सजीव ही हों। (कथा साभार: वॉट्सएप) 

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