यह निगम अब नहीं रहेगा कंगाल, जानिए कैसे?

Harshwardhan Bhati

Publish: Mar, 11 2017 09:04:00 (IST)

Jodhpur, Rajasthan, India
यह निगम अब नहीं रहेगा कंगाल, जानिए कैसे?

जोधपुर नगर निगम अब कंगाल नहीं रहेगा। यूडी टैक्स की वसूली से एेसा होगा। नगर निगम ने यूडी टैक्स मद में पिछले दस दिन में करीब 5 करोड़ रुपए का यूडी टैक्स वसूल किया।

शहरवासियों से अरबन डवलपमेंट (यूडी टैक्स) टैक्स वसूली को लेकर नगर निगम इन दिनों सख्ती बरत रहा है।

शहर के लोगों की नींद उड़ा दी

सालों तक सरकार की शिथिलता और अब वसूली को लेकर अचानक सख्ती ने शहर के लोगों की नींद उड़ा दी है। एक-एक दिन में पचास लाख तक का यूडी टैक्स वसूला जा रहा है। पिछले दो-तीन साल में तो इस टैक्स की वसूली दर में पचास फीसदी तक वृद्धि हुई है। नगर निगम ने 21 हजार लोगों को यूडी टैक्स के बकाया का नोटिस थमाया है।

भूखंडों के मालिकों से भी वसूली

निगम की ओर से इस बार शैक्षणिक संस्थानों, निजी अस्पतालों, होटलों और औद्योगिक भूखंडों सहित बड़े-बड़े आवासीय भूखंडों के मालिकों से भी वसूली की जा रही है। कुछ मामले कोर्ट में भी पहुंचे हैं। नगर निगम ने यूडी टैक्स को लेकर जोधपुर के तीनों विधानसभा क्षेत्रवार सूची तैयार की हैं। इसके हिसाब से नगर निगम का करीब 100 करोड़ रुपए का टैक्स बकाया निकल कर आ रहा है। ऐसे में अकेला यह टैक्स ही नगर निगम की कंगाली को दूर कर शहर के विकास को गति दे सकता है।

केवल सरकारी संस्थाओं के ही 60 करोड़ बकाया

निगम के आंकड़ों के अनुसार केवल सरकारी संस्थाओं के ही यूडी टैक्स के मद में करीब 60 करोड़ रुपए बकाया है। सरकार विभिन्न विभागों से बात करके अगर निगम को इस बकाया यूडी टैक्स का भुगतान करवा दे तो ही मुफलिसी के दौर से गुजर रहे निगम की वित्तीय स्थिति में सुधार आ जाए। इसके अलावा 40 करोड़ रुपए से ज्यादा अन्य लोगों का टैक्स बकाया है।

इस तरह काम आ सकता है यूडी टैक्स

निगम जिस हिसाब से यूडी टैक्स की राशि वसूल रहा है, उससे शहर के कई विकास कार्य हो सकते हैं। वर्तमान में 100 करोड़ से ज्यादा का टैक्स बकाया बताया जा रहा है, यदि ये पूरा वसूल लिया जाए तो निगम के कुल वार्षिक बजट का करीब बीस प्रतिशत तो यह राशि ही हो जाएगी। इस राशि से शहर की सफाई, सीवरेज और अन्य विकास कार्यों में लगाया जा सकता है। अब सवाल यह है कि निगम इस राशि का किस तरह शहर के विकास में उपयोग करेगा।

यूडी टैक्स का फार्मूला

आवासीय क्षेत्र के लिए : भूखंड का क्षेत्रफल (वर्गगज में)*डीएलसी दर (वर्ग मीटर में)/ 2000 (यानि भूखंड के क्षेत्रफल को डीएलसी रेट से मल्टीप्लाई करने पर जो संख्या आती है, उसमें 2000 से डिवाइड करने पर यूडी टैक्स की राशि निकलकर आ जाएगी।

शहर का विकास भी दिखे

निगम इन दिनों यूडी टैक्स तो जोर-शोर से वसूल रहा है। खुद महापौर घनश्याम ओझा भी इस बार किसी भी दबाव में नहीं आकर अपने अधिकारियों की कार्रवाई में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। इसका कारण सिर्फ इतना है कि निगम का खजाना भरेगा तो शहर का विकास होगा। पिछले दस दिनों में निगम की ओर से करीब 5 करोड़ रुपए का यूडी टैक्स वसूला गया है।



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