# Bribe case: एसीबी के जाल में फंसकर भी खुले घूम रहे कई 'बत्तीलाल'

shailendra tiwari

Publish: Apr, 15 2017 08:41:00 (IST)

Kota, Rajasthan, India
 # Bribe case: एसीबी के जाल में फंसकर भी खुले घूम रहे कई 'बत्तीलाल'

जेल में चल रहे वसूली के खेल का तो अब खुलासा हुआ है, लेकिन अन्य विभागों में तो लम्बे समय से यह खेल चल रहा है।

रिश्वत का मकडज़ाल : अधिकांश मामलों में नहीं मिली अभियोजन स्वीकृति


जेल में चल रहे वसूली के खेल का तो अब खुलासा हुआ है, लेकिन अन्य विभागों में तो लम्बे समय से यह खेल चल रहा है। जेलर बत्तीलाल ही नहीं,  ऐसे कई और लोग भी हैं, जो उच्च पदों पर बैठकर मोटी तनख्वाह लेने के बावजूद रिश्वत का खेल खुलेआम खेल रहे हैं। यही नहीं नजराना नहीं देने पर फाइलें दबाकर जनता को परेशान कर रहे हैं।  


काली कमाई को हक समझने वाले ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को परेशान लोग सबक सिखाने में भी पीछे नहीं रहे हैं। कुछ जागरूक लोगों की हिम्मत से काली कमाई से हाथ रंगने वाले पकड़े तो गए, लेकिन कुछ समय जेल में रहने के बाद आज वे फिर से आजाद घूम रहे हैं। 


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हालत तो यह है कि सरकार की ओर से अभी तक अधिकतर मामलों में अभियोजन स्वीकृति तक जारी नहीं हुई है। एेसे में इन मामलों की अदालत में सुनवाई भी शुरू नहीं हुई है। उन्हें सजा मिलना तो दूर की बात है। एसीबी कोटा में वर्ष 2016 में   रेंज में रिश्वत लेने, मांगने व पद के दुरुपयोग संबंधी 35 मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें पुलिस अधिकारी से लेकर इंजीनियर तक शामिल हैं।



रेलवे मानवेंद्र-सुरेश 

एसीबी जयपुर की टीम ने 14 जून 2016 को रेलवे के वरिष्ठ मंडल इंजीनियर मानवेन्द्र सिंह व मंडल इंजीनियर सुरेश सिंह को 1.99 लाख रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। विभाग ने उन्हें निलम्बित भी किया। फिर से बहाल कर दिया। करीब एक साल होने वाला है, लेकिन अभी तक सरकार ने अभियोजन स्वीकृति तक जारी नहीं की है। 



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पुलिस धनराज मीणा

एसीबी बूंदी की टीम ने 26 जून 2016 को बूढ़ादीत थाने के तत्कालीन एसएचओ धनराज मीणा (उप निरीक्षक) को 16 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। कुछ समय जेल में रहने के बाद वह अब जमानत पर है। इस मामले में भी अभी तक अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं हुई है।


ट्रैफिक अब्दुल हमीद

एसीबी कोटा की टीम ने 8 नवम्बर 2016 को दुर्घटना थाने के तत्कालीन एएसआई अब्दुल  हमीद को 15 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। एसपी ने उसे निलम्बित कर दिया। कुछ समय जेल में रहने के बाद आज वह भी अब बाहर है। इस मामले में भी अभी तक अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। 



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ये भी धरे गए 

एसीबी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016 में कृषि उपजमंडी समिति कोटा का वरिष्ठ लिपिक सुरेश शर्मा, पटवारी शिवशंकर कोड़प व जितेन्द्र रावल,  किशनगंज की कनिष्ठ लिपिक जयमाला सोनी, छबड़ा का मंडी सचिव बलवीर सिंह मीणा, श्रम विभाग कोटा का निरीक्षक रमेशचंद मीणा, जेकेलोन अस्पताल का एकाउंटेंट पंकज गुप्ता, महिला पर्यवेक्षक चंद्रप्रभा, छबड़ा नगर पालिका अध्यक्ष पिंकी साहू समेत कई अन्य लोग भी गिरफ्तार हुए। 


एसीबी की टीम ने  3 फरवरी 2016 को झालावाड़ आईटीआई के प्रिंसीपल कैलाशचंद अग्रवाल को एक निजी आईटीआई में परीक्षक लगाने की एवज में 5 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। 


इसी तरह सांगोद के हिंगी स्थित डॉ. भीमराव अम्बेडकर राजकीय बालिका आवासीय विद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य सियाराम माली को एसीबी बूंदी की टीम ने 15 अक्टूबर 2016 को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।


इस साल भी तीन मामले

एसीबी कोटा की टीम ने इस साल 20 जनवरी को बूंदी में रसद विभाग के प्रवर्तन अधिकारी इरफान कुरैशी को 10 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। वहीं 21 मार्च को एसीबी ने इटावा थाने के एसएचओ उप निरीक्षक महावीर सिंह को भी रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। 3 अप्रेल को जेलर को भी 12500 रुपए के साथ गिरफ्तार किया। इनकी भी जमानत हो गई है।



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