Big News: सरकार ने माना आरटीयू में शिक्षकों की पदोन्नति में हुआ फर्जीवाड़ा

shailendra tiwari

Publish: Jul, 11 2017 09:00:00 (IST)

Kota, Rajasthan, India
Big News: सरकार ने माना आरटीयू में शिक्षकों की पदोन्नति में हुआ फर्जीवाड़ा

पांचवें व छठें वेतन आयोग के अनुसार कॅरियर एडवांस स्कीम (सीएएस) के तहत राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की ओर से जुलाई 2015 में आयोजित साक्षात्कार के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई थी।

पांचवें व छठें वेतन आयोग के अनुसार कॅरियर एडवांस स्कीम (सीएएस) के तहत राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय की ओर से  जुलाई 2015 में आयोजित साक्षात्कार के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने कोई अनुमति प्रदान नहीं की गई थी। 


यह जानकारी खुद तकनीकी शिक्षा विभाग ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में उपलब्ध कराई है। साक्षात्कार में अनियमितताओं एवं चहेतों को उपकृत करने का मामला सामने आने के बाद इस प्रकरण की जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो कर रहा है। इस मामले में मिली शिकायत पर एसीबी के डीजी ने टिप्पणी करते हुए लिखा था कि यह काफी गंभीर है, इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए। इस मामले की जांच के लिए सरकार ने कमेटी गठित की थी, जिसे पिछले दिनों बिना किसी वजह के बदल दिया गया। 


Read More: कोटा के मंदिर में दलित लड़कियों को पूजा करने से रोका


वेतन आयोग की शर्तें दरकिनार 

विवि प्रशासन की ओर से जिन शिक्षकों को पदोन्नत किया गया था, उसमें कई खामियां सामने आई थी। छठे वेतन आयोग का लाभ 1 जनवरी 2006 से लागू किया गया था, लेकिन  विवि के अधिकारी एवं शिक्षक अपनी पदोन्नति पांचवें वेतन आयोग के अनुसार चाह रहे थे, क्योंकि उसमें पदोन्नति की शैक्षणिक अर्हताएं व शर्तें सरल थी। इसका लाभ उठाते हुए विवि प्रशासन ने छठे वेतन आयोग की शर्तें पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति के आदेश जारी कर दिए।


Read More: आपबीतीः अमरनाथ यात्रा पर आतंकी हमले के बाद पहलगाम में फंसे कोटा के श्रद्धालु


जिम्मेदारों ने किया था आगाह

तत्कालीन रजिस्ट्रार संजीव मिश्रा ने जून 2015 में कुलपति, उपकुलपति एवं सभी डीन को कार्यालय आदेश जारी किया था। जिसके अनुसार पांचवें वेतन आयोग के अनुसार पदोन्नतियों के लिए राज्य सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है।  


Read More: कृषि मंत्री पर भड़के राजावत, कहा- 'प्रभु' समय पर आया करो, जनता परेशान होती है


तत्कालीन वित्त नियंत्रक गजानंद सोनी ने एक जुलाई 2015 को राज्य सरकार को पत्र लिखकर आगाह किया था। जिसके अनुसार  'यदि कोई अनियमितता या नियमों के विपरीत कार्य विभाग/कार्यालय में पदस्थापित लेखाधिकारियों की सलाह के बिना किया जाता है तो विभागाध्यक्ष एेसी कार्यवाही के लिए पूर्णतया जिम्मेदार होगा। उन्होने आरटीयू एक्ट 2006 की धारा 35 का हवाला देते हुए लिखा था कि सीएएस के लिए राज्य सरकार की पूर्वानुमति लेना अनिवार्य है।

kota/road-accident-in-kota-2624529.html">

Read More:  हैंगिंग ब्रिज उद्घाटन में देरी ने बेटियों के सिर से उठाया पिता का साया


Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned