Made In Kota: आईआईटी कॉलेज पहुंचने की होड़ में 2.20 लाख स्टूडेंट

Kota, Rajasthan, India
Made In Kota: आईआईटी कॉलेज पहुंचने की होड़ में 2.20 लाख स्टूडेंट

सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग एंट्रेंज एग्जाम जेईई एडवांस 21 मई को है। इसमें शामिल होंगे 2.20 लाख स्टूडेंट। ये एक ऐसा एग्जाम है, जिसमें यह तक पता नहीं होता कि पेपर कैसा होगा, कितने प्रश्न आएंगे, नेगेटिव मार्किंग कितनी होगी।

जेईई एडवांस से मिलेगा 'सुपर ब्रेन'


सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग एंट्रेंज एग्जाम जेईई एडवांस 21 मई को है। इसमें शामिल होंगे 2.20 लाख स्टूडेंट। ये एक ऐसा एग्जाम है, जिसमें यह तक पता नहीं होता कि पेपर कैसा होगा, कितने प्रश्न आएंगे, नेगेटिव मार्किंग कितनी होगी।  



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लगभग हर पीसीएम स्टूडेंट आईआईटीयन बनना चाहता है, लेकिन यह हासिल करने के लिए उसे जेईई एडवांस के जटिल पढ़ाव को पार करना  होता है। शायद इसीलिए आईआईटीयन को सुपर ब्रेन कहा जाता है।  आइये जानते हैं जेईई एडवांस में कामयाबी के टिप्स कोचिंग इंडस्ट्री के एक्सपर्ट्स से...। 


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जेईई एडवांस के बारे में ये जानकारियां अहम 


पेपर खुद आईआईटी कॉलेज तैयार करते हैं। 

हर वर्ष एक आईआईटी कॉलेज को इसका मौका मिलता है। 

इस बार आईआईटी चेन्नई एडवांस का पेपर तैयार करेगा। 

जेईई का पेपर हर साल एक नया रूप लिए होता है।

पेपर कितने नंबर का आएगा, कितने प्रश्न आएंगे, नेगेटिव मार्किंग कितनी होगी, यह पूर्व में तय नहीं होता। 

पेपर में फिजिक्स, केमिस्ट्री एवं मैथ तीनों सब्जेक्ट्स से बराबर अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। 

एडवांस के पेपर में हर साल सरप्राइजिंग क्वेश्चन आते हैं।


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एक्सपर्ट पैनल 


नेगेटिव मार्किंग पर ध्यान



फिजिक्स के पेपर में तीन टाइप के प्रश्नों का समावेश होता है। पहले शुद्ध थ्योरोटिकल, दूसरा शुद्ध न्यूमेरेटिकल एवं तीसरा थ्योरोटिकल व न्यूमेरेटिकल मिक्स।  स्टूडेंट्स के लिए जो टॉपिक सबसे आसान हैं, उनमें मैकेनिक्स, फ्लुइड मैकेनिक्स, हीट एंड थर्मोडायनेमिक्स, वेव्स, ग्रेविटेशन, करंट केपेसिटेन्स, मैग्नेटिक फील्ड एंड फोर्स, मॉडर्न फिजिक्स, रे ऑप्टिक्स हैं। इसके अलावा पिछले पांच से दस साल के पेपर्स सॉल्व करना नहीं भूलें। नेगेटिव मॉर्किंग को लेकर सजग रहें। 

आरके वर्मा, प्रबंध निदेशक, रेजोनेंस  



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पुराने पेपर्स जरूर देखें



मैथेमेटिक्स में अच्छे प्रदर्शन का एकमात्र तरीका है कि पिछले सालों के पेपर में पूछे सवालों को ध्यान में रखकर कर समस्याएं सुलझाएं। प्रोबेबिलिटी या इनडेफिनेट इंटीग्रेशन, थ्री डी जैसे टॉपिक पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। एक और चैप्टर कॉम्प्लेक्स नंबर है। हर साल इस चैप्टर से 2.3 सवाल जरूर पूछे जाते हैं। यदि आप में फ्ंक्शंस को ग्राफ   के रूप में प्रस्तुत करने की क्षमता है तो एल्जेब्रा आपके लिए आसान हो सकता है। एलजेब्रा में परम्यूटेशनकृ कॉम्बिनेशन और प्रोबेबिलिटी महत्वपूर्ण टॉपिक हैं।

बृजेश माहेश्वरी, निदेशक, एलेन कॅरियर इंस्टीट्यूट 



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कॉन्सेप्ट से ही मदद 



केमिस्ट्री में न्यूमेरिकल रोज हल करने की आदत डालें। मोल कॉन्सेप्ट, केमिकल इक्विलिब्रियम और इलेक्ट्रो केमिस्ट्री पर विशेष ध्यान दें। ऑर्गेनिक केमिस्ट्री को लेकर सावधान रहे। स्टीरियो केमिस्ट्री, जनरल ऑर्गेनिक केमिस्ट्री और फ्ंक्शनल ग्रुप एनालिसिस पर ध्यान दें। ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में पूछे जाने वाले अधिकतर सवाल कॉन्सेप्चुअल होते हैं। 60 प्रतिशत प्रश्न भी हल कर लिए तो आप सुरक्षित हैं। प्रतिवर्ष पेपर पैटर्न में बदलाव होता है, ऐसे में क्लियर कॉन्सेप्ट ही मददगार होता है। 

विशाल जोशी, निदेशक, न्यूक्लियस एजुकेशन

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