एक दवा अंदर से, बाकी बाहर से लाओ...नि:शुल्क दवा योजना में सामान्य इंजेक्शन व एंटी बायोटिक का भी टोटा

shailendra tiwari

Publish: Dec, 01 2016 12:53:00 (IST)

Kota, Rajasthan, India
एक दवा अंदर से, बाकी बाहर से लाओ...नि:शुल्क दवा योजना में सामान्य इंजेक्शन व एंटी बायोटिक का भी टोटा

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत 612 दवाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में एंटीबायोटिक, बुखार, दर्द, श्वासरोग, एलर्जी से लेकर जीवनरक्षक दवाएं भी निजी या सहकारी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।

मुख्यमंत्री नि:शुल्क दवा योजना के तहत 612 दवाएं मुहैया कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन कोटा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में एंटीबायोटिक, बुखार, दर्द, श्वासरोग, एलर्जी से लेकर जीवनरक्षक दवाएं भी निजी या सहकारी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही है। अस्पतालों के सब ड्रग स्टोर में 300 ही दवाएं उपलब्ध हैं। इनमें भी सर्वाधिक उपयोग में आने वाली दवाएं की आपूर्ति करीब दो माह से नहीं हो रही है।


बच्चों का एक भी एंटीबायोटिक नहीं


नए अस्पताल में बच्चों के लिए एक भी एंटीबायोटिक उपलब्ध नहीं है। चोट या दुर्घटना में घायल होने पर टिटनेस जैसे सामान्य इंजेक्शन के लिए भी मरीज को अस्पताल के बाहर दौडऩा पड़ रहा है। यहीं हाल एमबीएस के भी है। यहां भी हर दूसरे पर्चे पर लिखी जाने वाली एंटी एलर्जिक टेबलेट सिट्राजिन, बुखार व दर्द की डायक्लोपैरा भी निजी स्टोर से खरीदनी पड़ रही है।


डेंगू मलेरिया की दवा का भी टोटा


तीनों अस्पतालों में भर्ती मरीजों के डेंगू व मलेरिया में लगने वाले आर्टी सुनेट इंजेक्शन दो माह से उपलब्ध नहीं हैं। दवाओं से होने वाली एसीडिटी को रोकने की दवा रेनेटिडिन और पेंटापेराजोल भी चार माह से मरीजों को नहीं मिल रही। साथ ही इसकी स्थानीय खरीद भी नहीं हो रही है। एंटीबायोटिक के साथ दी जाने वाली विटामिन बी कॉम्पलेक्स और अस्थि रोगियों ं को लिखी जाने वाली कैल्शियम टेबलेट की भी यही स्थिति है।


जीवनरक्षक दवाओं  की भी स्थिति खराब


अस्पतालों में एंटी रैबीज वैक्सीन पिछले दो सप्ताह से नहीं मिल रहे है। एक अन्य जीवन रक्षक व महंगी एट्रोपिन तो तीन माह से मरीजों को नहीं मिल रही है। 


एएनए हिट बंद होना सबसे बड़ी समस्या


नि:शुल्क दवा योजना का पूरा सिस्टम ऑनलाइन है, लेकिन मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में उपलब्ध दवाओं की ही एंट्री की जाती है, जबकि सभी दवाओं की एंट्री की जानी चाहिए, जो दवा उपलब्ध नहीं है, उनको एनए (नॉट एवेलेबल ) हिट कर दिया जाता है। ताकि शॉर्ट दवा की जानकारी उच्चाधिकारियों तक पहुंच सके, लेकिन कोटा में एेसा नहीं हो रहा है। एेसे में समय पर एनओसी नहीं मिल रही और स्थानीय स्तर पर खरीद प्रक्रिया में देरी से भी मरीजों को दवा नहीं मिल रही है।


फैक्ट फाइल


-612 सरकार की नि:शुल्क दवा सूची 

-416 मेडिकल कॉलेज के ड्रग वेयर हाउस में 

-320 दवाएं अस्पतालों के सब ड्रग स्टोर में 

-280 दवाओं की स्थिति डीडीसी काउंटरों पर

-5 हजार रोज आने वाले मरीज अस्पतालों में 

-28 डीडीसी काउंटर तीनों अस्पतालों में 


कमी है, एनओसी जारी कर दी


 दवाइयों की कमी हैं, इनके लिए अस्पतालों को एनओसी जारी कर दी है। ताकि अस्पताल स्थानीय खरीद कर ले। वहीं करीब 300 दवाओं की खरीद का अनुमोदन आरएमएससीएल को जयपुर भेजा है।-डॉ. अमित सारस्वत, प्रभारी, एमसीडीडब्ल्यू


एनए हिट शुरू करवा देंगे


दवाओं की कमी हो रही है तो दिखवाता हूं। एनए हिट को भी शुरू करवा देंगे।-ओपी कसेरा, एमडी, आरएमएससीएल, जयपुर


आगे से दवा नहीं आ रही


आगे से दवा नहीं आ रही है। एनओसी मिल गई है और स्थानीय खरीद में समस्या है तो दिखवाते हैं।-डॉ. पीके तिवारी, कार्यवाहक अधीक्षक, एमबीएस, कोटा


आर्डर किए हैं


दवाएं नहीं आ रही है। स्थानीय खरीद के ऑर्डर किए हैं। सप्लायर को एक माह का समय मिलता है। -डॉ. एसआर मीणा, अधीक्षक, नए अस्पताल 

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