पोषक तत्वों के बिना पौधों का जीवन चक्र संभव नहीं

Kota, Rajasthan, India
पोषक तत्वों के बिना पौधों का जीवन चक्र संभव नहीं

रविवार को मल्टीपरपज स्कूल में कोटा होर्टिकल्चर सोसायटी की ओर से आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।

मिट्टी पृथ्वी की सबसे ऊपरी सतह है। इसमें चट्टानों के विविध प्रकार के कण हयूमस के रूप में पौधों एवं जीव जंतुओं के मृत एवं सड़े-गले अवशेष सम्मिलित होते हैं। यह मिट्टी जीवन से परिपूर्ण होती है। यह कहना है सीएडी से सेवानिवृत्त सहायक निदेशक आरडी शर्मा का। वे रविवार को मल्टीपरपज स्कूल में कोटा होर्टिकल्चर सोसायटी की ओर से आयोजित सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।




उन्होंने बताया कि मिट्टी में जीवाणु, कीटाणु व जीव जंतु होते हैं जो रासायनिक अभिक्रिया से मिट्टी के गुणों में परिवर्तन और वृद्धि करते हैं। पोषक तत्वों के बिना पौधों का जीवन चक्र पूरा नहीं होता। उन्होंने किचन गार्डन में उपयोग आने वाली मिट्टी, संरचना, उन्नयन, मिट्टी पोषक तत्व, बीजों का चयन एवं बुवाई के बारे में बताया।



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लैबोरेट्री के मोडिफाई जीन सब्जी में नहीं

कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक पीके गुप्ता ने बताया कि बीज पौधों का जनक होता है जो अंकुरण के बाद पौधे और फिर वृक्ष में परिवर्तित हो जाता है। जीएमओ बीज अर्थात जीन मॉडिफाइड ऑर्गन के रुप में प्राप्त होता है। इसमें लेबोरेट्री में जीन मॉडिफाई करते हैं, लेकिन यह सब्जी में उपलब्ध नहीं है। आकार में बड़े बीजों को दो से तीन इंच, लेकिन छोटे बीजों को 1 इंच से कम गहराई में बोना चाहिए।



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रोगों से बचाव में सहायक कोकोपीट

दिनेश कुमार शर्मा ने सोइल लेस ग्रो मीडिया के बारे में बताया कि किचन गार्डनिंग विशेष रूप से कंटेनर गार्डनिंग के लिए कोकोपीट उपयोग में लेते हैं, जोकि नारियल से मिलता है। यह मिट्टी जनित रोगों से बचाव में सहायक होता है। इसमें पानी एवं ऑक्सीजन धारण की क्षमता अधिक होती है। कोकोपीट में वम्र्स के लिए उचित तापमान और वातावरण उपलब्ध रहता है, उनकी लगभग 25 परसेंट अधिक ग्रोथ होती है। 

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