कोटाः पत्थर तोड़ने वाले का बेटा बनेगा आईआईटियन

Kota, Rajasthan, India
कोटाः पत्थर तोड़ने वाले का बेटा बनेगा आईआईटियन

पत्थर तोड़कर उसने सपने जोड़े... ख्बाब देखा कि बेटा भी उसी की तरह राजस्थान की पत्थर खदानों में छेनी-हथोड़े ना चलाए... बेटे ने भी परिवार की किस्मत बदलने की ठान ली और छेनी-हथौड़े की जगह कलम उठा ली... खुशहाली की जिद नतीजा ये निकला कि बेटा अब देश के सर्वोच्च इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में पढ़ाई करेगा।

नाम तो उसका भगवान है... लेकिन, किस्मत पर ऐसे पत्थर पड़े कि पूरी जिंदगी उन्हें तोड़ते-तोड़ते गुजर गई...दो वक्त की रोटी जुटाना तक मुहाल होता ऐसे में बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे जुटाना किसी संघर्ष से कम ना था। भगवान दिन रात अपनी किस्मत बदलने का ख्वाब देखता... जिसे बेटे दिलीप ने सच कर दिखाया। बदहाली के बावजूद उसने सफलताओं का ऐसा पत्थर तोड़ा कि वह अब देश के सर्वोच्च इंजीनियरिंग संस्थान आईआईटी में पढ़ाई करेगा। 



जोधपुर जिले के छोटे से गांव खुदियाना में भगवान और कमला देवी जैसे-तैसे अपनी गुजर बसर कर रहे हैं। भगवा का पूरा जीवन खदानों में पत्थर तोड़ते हुए निकल गया। बच्चे बड़े हुए तो उन्हें पढ़ाने का सपना देखा, लेकिन पैसे की तंगी आड़े आ गई। छोटे बेटे दिलीप ने जब दसवीं कक्षा में 85 फीसदी अंक हासिल किए तो भगवान की उम्मीदें फिर जाग उठीं। परिचितों ने सलाह दी कि बेटा पढ़ने में अच्छा है इसे इंजीनियरिंग की तैयारी करने कोटा भेज दो, लेकिन इस बार भी पैसा आड़े आया तो उन्होंने जमीन पर लोन ले कर बेटे का दाखिला कोटा के एलन कोचिंग में करा दिया। जहां उसकी योग्यता और मजबूरी को देख एलन ने आधी फीस भी माफ कर दी।  



Read more: जेईई एडवांस- हर टॉपर के पीछे एक मां होती है... 



बेटे ने गाढ़ा मील का पत्थर 

बेटे की पढ़ाई के लिए माता-पिता ने नरेगा तक में मजदूरी की। दो साल की कड़ी मेहनत के बाद जब बीते दिनों जेईई एडवांस का रिजल्ट आया तो पूरे परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। दिलीप ने सफलताओं का ऐसा पत्थर गाढ़ा कि उसकी एससी कैटेगरी में अखिल भारतीय स्तर पर 128वीं रैंक हासिल हुई। 



Read more: विमंदित बच्चों को जिंदगी में खुशियां भरने तुर्की से कोटा आई जुलेहा



ये टीवी-स्मार्ट फोन क्या होता है 

दिलीप ने कोटा आते ही तय कर लिया था कि उसे एक बार में ही आईआईटी में दाखिला लेना है। इसके लिए उसने बेहद कड़ी मेहनत की। बीते दो साल में टीवी देखना तो दूर की बात स्मार्ट फोन तक नहीं देखा। दिलीप ने कहा कि वह सबकी उम्मीदों पर खरा उतर सका, इसमें कोटा का बहुत बड़ा योगदान है। यहां आकर पढ़ाई के स्तर में बहुत सुधार हुआ। अब इंजीनियर बनकर परिवार के लिए कुछ कर सकेगा। दिलीप अब मैकेनिकल ब्रांच से बीटेक करना चाहता है।



Read more: मोबाइल छोड़ा तो जेईई एडवांस के फलक पर चमका 'सूरज'



कोटा पूरे कर रहा सपने

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट के निदेशक नवीन माहेश्वरी ने दिलीप की सफलता पर कहा कि निर्धन परिवारों के प्रतिभावान विद्यार्थियों के सपने कोटा पूरे कर रहा है। गांव-ढाणी के विद्यार्थी देश के श्रेष्ठ संस्थानों में पहुंचे और देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएं, यही हमारा उद्देश्य है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned