स्त्री अस्तित्व के नए मायने

Opinion
स्त्री अस्तित्व के नए मायने

भावनाओं और संबंधों की आड़ी टेडी पगडंडियों पर रिश्तों को परिभाषित करती कहानीकार शोभा नारायण का प्रस्तुत कहानी संग्रह  'फिलहाल' की सभी 14 कहानियां पाठक को अपने शब्दों की लय से पूरी तरह जोड़ लेती हैं। 

भावनाओं और संबंधों की आड़ी टेडी पगडंडियों पर रिश्तों को परिभाषित करती कहानीकार शोभा नारायण का प्रस्तुत कहानी संग्रह  'फिलहालÓ की सभी 14 कहानियां पाठक को अपने शब्दों की लय से पूरी तरह जोड़ लेती हैं। पति-पत्नी, मां-बेटी, प्रेमी-प्रेमिका, दोस्ती के रिश्तों को शोभा नारायण ने अपनी कहानियों में नया आकाश प्रदान किया है। 

पुस्तक की पहली कहानी 'फैसलाÓ में कहानीकार ने तमाम विपरीत हालात के बावजूद औरत के भीतर के औरतत्व को पूरी चेतना और आत्मगौरव के साथ प्रस्तुत किया है। 

कहानी में चार पतियों की साझा पत्नी अपने वास्तविक प्रेम को कहीं और ढूंढती है और उसे बिना संकोच के साथ अपने बच्चों के सामने स्वीकार भी करती है। अन्य कहानी 'फिलहालÓ में कहानीकार ने लड़की के लड़की होने, उस पर थोपे जाने वाली समाज की पाबंदियों की जंजीर और उसके साथ होने खिलवाड़ को दिल छू लेने वाले शब्दों में पेश किया है। औरत की आत्मचेतना की ये कहानियां नारी के अस्तित्व के नए मानक तय करती हैं। 

हर विषय को उसके चरम तक ले जाने की कहानीकार की कोशिश कहानी को एक नया सौंदर्य प्रदान करती है और पाठक को पूर्ण संतुष्टि। स्त्री-पुरुष संबंधों को नए सिरे से कुरेदती ये कहानियां नारी के अस्तित्व और उसकी अस्मिता को नया आयाम प्रदान करती है। 
पुस्तक : फिलहाल (कहानी संग्रह)
लेखक : शोभा नारायण
प्रकाशक : अभय पब्लिकेशन, दिल्ली 
पृष्ठ : 148    
मूल्य : 495 रुपए   

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