इश्क की खातिर

Rajeev sharma

Publish: Feb, 14 2017 12:58:00 (IST)

Opinion
इश्क की खातिर

बेचारे मजनूं को अंदाज भी नहीं होगा कि उसकी लैला ने रात बारह बजे से ही ऐसे संदेशों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया है और वह डेढ़ दर्जन आशिकों को प्रेम का जवाबी संदेश भेज भी चुकी है।

प्रेम के पुजारी, हम हैं रस बिहारी- यह शब्द हमारी जुबान पर इसलिए आ रहे हैं कि आज आधुनिक प्रेम दिवस है। देश के खाये-पिये, अघाए बापों की औलादें आज प्रेम के रंग में सराबोर होंगी। जो ढंग से प्रेम, इश्क, लव, मोहब्बत लफ्जों के अर्थ भी नहीं समझते वे भी अपने आपको मजनूं का कलियुगी अवतार समझकर अपनी कथित प्रेमिका को व्हाट्सअप पर संदेश भेजेंगे- बेबी! आई लव यू और उधर से जवाब आएगा- डार्लिंग! आई लव यू टू। 




बेचारे मजनूं को अंदाज  भी नहीं होगा कि उसकी लैला ने रात बारह बजे से ही ऐसे संदेशों का आदान-प्रदान शुरू कर दिया है और वह  डेढ़ दर्जन आशिकों को प्रेम का जवाबी संदेश भेज भी चुकी है। 




आज के ही दिन कुछ दुश्मनेइश्क सार्वजनिक स्थलों जैसे सरकारी गार्डन या  प्राइवेट कैफे में प्रेमप्रदर्शन करने वाले तोता-मैनाओं की टोह में निकलेंगे और उन्हें सबके सामने घसीट कर अपने आपको पतनशील संस्कृति के सबसे बड़ा रक्षक होने का परिचय देंगे। 




कुछ अतिरिक्त जागरूक बाप अपनी पुत्रियों को सुबह उठते ही चेतावनी देंगे कि आज अगर घर से बाहर कदम भी रखा तो टांग तोड़ दूंगा। जबकि उसका लाड़ला उसकी पेन्ट की जेब से रुपए मार कर अपनी मूर्ख माशूका को आइसक्रीम चटाने पर गर्व महसूस करेगा और अपनी बीवी यानी छोरे की मम्मी से कहेगा कि मेरा बेटा लड़की नहीं फंसाएगा तो फंसाएगा कौन। 




अब ऐसा नहीं कि आज हमारे जैसे भूतपूर्व प्रेमियों का जी उछाले नहीं मारेगा। भारतीय प्रेम दिवस यानी बसंत पंचमी को श्रीमतीजी ने मीठे पीले चावल बनाकर खिलाये थे तो हम  पाश्चात्य वैलेन्टाइन-डे पर उन्हें पिज्जा खिलाकर खुश करेंगे। 




वैसे हमारा मानना है कि इंसान को अपनी जिंदगी का हर दिन प्रेम दिवस के रूप में मनाना चाहिए क्योंकि क्या पता किसकी फूंक कब निकल जाए। हम तो नौजवानों से यही कहना चाहते हैं-प्रेम करो तो जम के करो पर भंवरे की तरह नहीं मजनूं की तरह।

व्यंग्य राही की कलम से 




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