आठ साल से मौत संग जूझ रही जिंदगी, बीमारी ऐसी कि 37 साल का डालू रह गया 20 किलो का

Abhishek Pareek

Publish: Jul, 17 2017 09:33:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
आठ साल से मौत संग जूझ रही जिंदगी, बीमारी ऐसी कि 37 साल का डालू रह गया 20 किलो का

उसे एेसी ला-इलाज बीमारी ने जकड़ लिया जिसमें मांसपेशियों की ताकत क्षीण होने के अलावा दिन-ब-दिन वजन कम होने लगा।

करीब सोलह साल पहले गमनी जब डालचंद उर्फ डालू से ब्याह कर बीछड़ी गांव आई तो उसे जीवन की त्रासदी का जरा भी इल्म नहीं था। होता भी कैसे? उसे तो मेहंदी रचे हाथों से पिता ने साल 2000 में भले-चंगे डालचंद गमेती को सौंपा, जिसने आईटीआई में फिटर का कोर्स पास कर रखा था। एक लड़का और लड़की के रूप में पहली दो संतानों के बाद कभी-कभार डालू को चक्कर आने की शिकायत होने लगी। हालांकि, इस बीच रोजगार के सिलसिले में वर्ष 2008 में एकाध माह के लिए डालू बहरीन भी गया। इधर, तीसरी संतान के जन्म के साथ ही उसे एेसी ला-इलाज बीमारी ने जकड़ लिया जिसमें मांसपेशियों की ताकत क्षीण होने के अलावा दिन-ब-दिन वजन कम होने लगा। अलग-अलग अस्पतालों में जांचों और इलाज के दौरान आखिर एक दिन इस बात का खुलासा हो ही गया कि इस बीमारी का इस देश में तो इलाज नहीं। पिता जो मरने के बाद खेती-बाड़ी लायक जमीन छोड़ गए, उसमें बहुत सी बीमारी के नाम बिक गई। 




बेटा पढ़ाई छोड़ मजदूरी करने लगा
हालात बिगड़े तो बड़ा लड़का पढ़ाई छोड़कर दिहाड़ी मजदूरी करने लगा और बूढ़ी मां नोजी बकरियां चरा रही है। बेटी और छोटा बेटा डालू के स्कूली समय के मित्र श्यामलाल नागदा और प्रेमसिंह राणावत की  मदद से पढ़ाई कर रहे हैं। वे भी कब तक कर पाएंगे, कोई नहीं जानता। डालू की पत्नी गमनी कहती है किस्मत का लिखा भोगने के बाद अब केवल इस बात की चिंता सता रही है कि किसी तरह बच्चों का भविष्य संवर जाए।






बीपीएल कार्ड तक नहीं बना
केलूपोश छोटे कमरे में डालू की पत्नी गमनी उसे कुछ पिलाने का प्रयास कर रही थी। पूछने पर झिझकते हुए कहती है 'यही कमरा तो पिछले 10-12 वर्षों से उसकी पूरी दुनिया बना हुआ है। इसमें वह अपने तीनों बच्चों संग जीवन बसर कर रही है। सुबह-शाम और वक्त जरूरत डालू को कांधे पर लादकर शौच-निवृत्ति के लिए जरूर बाहर ले जाती है। बीपीएल कार्ड के लिए पूर्व सरपंच कमलसिंह और वर्तमान सरपंच बाबूसिंह भी कोई सुनवाई नहीं कर रहे।'

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