लेकसिटी को अब मिले प्रशिक्षित गोताखोर...हादसों पर लगेगा लगाम

madhulika singh

Publish: Jun, 18 2017 10:39:00 (IST)

Udaipur, Rajasthan, India
लेकसिटी को अब मिले प्रशिक्षित गोताखोर...हादसों पर लगेगा लगाम

उदयपुर लेकसिटी की झीलों में कोई भी हादसा होने पर प्रशासन के पास राहत एवं बचाव के नाम पर परम्परागत संसाधन एवं स्वयंसेवी गोताखोर ही हैं जिससे रेस्क्यू में सफलता मिलने में काफी समय लगता रहा है। यह स्थिति गतदिनों फतहसागर में नावों की भिड़ंत में जयपुर की मासूम चहक के डूबने पर सामने आई थी।


चहक के डूबने पर प्रशासन एवं नौका संचालन से जुड़ी फर्म के पास डाइविंग शूट (स्कूबा) नहीं था। प्रशासन की आपदा बैठक में भी यह बात सामने आई, लेकिन उसने अब तक कोई पहल नहीं की है। इस बीच, फतहसागर में आरटीडीसी के अधीन नौका संचालन करने वाली फर्म यश एम्यूमेंट ने दो डाइविंग शूट खरीदने के साथ ही कार्मिक सुहेल को पुणे के स्कूबा इंडिया सेंटर में प्रशिक्षण दिलवाया है। प्रशिक्षण के बाद सुहेल ने अन्य कर्मचारी वेला राम को भी प्रशिक्षण दिया। इसके बाद दोनों ने रविवार को फतहसागर झील में रेस्क्यू का डेमो किया। साथ ही लेकसिटी में ही नहीं, संभाग में भी कहीं भी हादसा होने और जरूरत पडऩे पर प्रशासन को सहयोग करने के लिए तैयार रहने का भरोसा दिलाया है।

25 मिनट तक पानी में


इस शूट का वजन करीब 20 किलो ग्राम है जिसे पहन कर प्रशिक्षित गोताखोर करीब 25 मिनट तक पानी में रहकर तलाशी कर सकता है। सांस ज्यादा लेने की स्थिति में वह 10 मिनट से ज्यादा अंदर नहीं रह सकता है।

ओपन सर्किट शूट


इस शूट की यह खासियत है कि यह 10 फीट से ज्यादा गहराई में काम करने में आसान रहता हैं। इसको पहनकर उतरने में लेडर (सीढि़यां) का सहारा लेना पड़ता है। पानी में तलाशी के दौरान तैरना व सतह पर खड़ा रहना संभव है। पानी से बाहर आने के लिए भी लेडर का सहारा लेना पड़ता है।

अंडर वाटर कैमरा


रेस्क्यू टीम अंडर वाटर कैमरे की मदद से पानी में 2 फीट के दायरे की रिकार्डिंग कर सकती है जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी मदद मिलती है। पानी में रहने के दौरान रेस्क्यू दल से केवल आवाज के सहारे ही संपर्क किया जा सकता है। हालांकि, डेमो के दौरान अंडर वाटर कैमरे की रिकार्डिंग में हरा पानी ही नजर आया।

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