खेत तलाई में डूबा 290 किसानों का अनुदान

abhishek ojha

Publish: May, 19 2017 04:47:00 (IST)

Gangapur City, Rajasthan, India
खेत तलाई में डूबा 290 किसानों का अनुदान

गंगापुरसिटी. वर्षा का जल संचित कर सिंचाई के उपयोग में लाने के लिए कृषि विभाग किसानों को खेत तलाई (फार्म पाण्ड) खुदवाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

गंगापुरसिटी. वर्षा का जल संचित कर सिंचाई के उपयोग में लाने के लिए कृषि विभाग किसानों को खेत तलाई (फार्म पाण्ड) खुदवाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। हाथों हाथ पत्रावलियों की जांच करके उन पर अनुदान की स्वीकृति जारी की जा रही है, लेकिन जिले के कुछ काश्तकार ऐसे हैं जो खेत तलाई बनाने के बाद भी सरकार से मिलने वाले अनुदान के लिए तरस रहे हैं। कृषि विभाग ने साल भर इन किसानों से चक्कर लगवाए और बाद में अनुदान राशि  देने से मना कर दिया। यह प्रकरण 2014-15 का है। इस वर्ष में खेत तलाई के लिए किसानों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए। संबंधित आदेश 31 जुलाई 2014 को  प्रेषित किए गए थे। इधर कृषि अधिकारियों ने पूर्व की वर्षों की तरह अप्रेल के प्रथम सप्ताह में ही तलाई निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी। वहीं किसानों को राजी कर उनसे ऑफलाइन आवेदन लेकर मानसून से पहले तलाई तैयार करवा ली। तलाई के निर्माण पर सवा लाख रुपए की लागत आती है जिसमें 52 हजार रुपए अनुदान सरकार की ओर से दिया जाता है।

असमंजस की स्थिति

कृषि निदेशालय से ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने के मिले आदेशों से असमंजस की स्थिति बन गई। कृषि विभाग ने 300 से अधिक किसानों की पत्रावलियों को अनुदान राशि के भुगतान के लिए निदेशालय को अग्रेषित किया। निदेशालय ने ऑनलाइन ऑवेदन नहीं भेजने का कारण बताकर वित्तीय स्वीकृति देने से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में जो पत्र जारी किया गया वो सवाईमाधोपुर कार्यालय को पांच माह बाद दिसम्बर में जाकर मिला था। तब तक स्थानीय अधिकारी किसानों को अनुदान मिलने का आश्वासन देकर टरकाते रहे। इस बीच किसानों ने अनुदान मिलने की उम्मीद में खेत तलाई का  निर्माण करा लिया। 

जारी रहे प्रयास

 कृषि अधिकारियों ने किसानों को नुकसान की स्थिति का हवाला देकर निदेशालय से मार्च 2015 तक पत्र व्यवहार किया। वहीं अनुदान देने की अपील की, लेकिन निदेशालय की ओर से कोई ऑफ लाइन आवेदन करने वाले किसानों को कोई रियायत नहीं मिली। किसानों का आरोप है कि कृषि अधिकारी जुलाई से दिसम्बर माह के बीच अगर सक्रिय रहते तो उनको अनुदान का भुगतान मिल सकता था।

पास के जिलों में हुआ भुगतान

सवाईमाधोपुर की सीमा से जुड़े दौसा, टोंक व भरतपुर सहित शेष अन्य जिलों के किसानों को ऑफ लाइन आवेदन करने के बावजूद खेत तलाई खुदवाने पर अनुदान राशि भुगतान कर दिया गया। इससे से संबंधित दस्तावेजों को इकट्ठा कर पीडि़त किसानों ने राज्य से लेकर केन्द्र के कृषि मंत्री तक को ज्ञापन सौंपे व पत्र लिखे, लेकिन इसके बावजूद उनको अनुदान की मद में मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया गया।

कृषि अधिकारियों की लापरवाही


बाटोदा पंचायत के राधेश्याम बैरवा ने बताया कि स्थानीय कृषि अधिकारियों पर विश्वास कर हमने अपने खेत में तलाई का निर्माण कर लिया, लेकिन हमें अनुदान की मद में मिलने वाली राशि का भुगतान नहीं किया गया। इसी प्रकार  जीवत ग्राम पंचायत के नवाडिय़ा मीणा व बाटोदा के हरगोविंद माली ने बताया कि प्रदेश के दूसरे जिले के किसानों को खेततलाई खुदवाने पर ऑनलाइन आवेदन नहीं करने के बावजूद भुगतान किया गया, जबकि सवाईमाधोपुर के किसानों से सौतेला व्यवहार किया गया जिससे वे अनुदान राशि से वंचित रहे। स्थानीय अधिकारियों की इसमें लापरवाही रही। 

वित्तीय अनुमति नहीं मिली

&2014 में प्रथम बार ऑनलाइन आवेदन मांगे गए। इसके दिशा-निर्देश बाद में मिले। वहीं मानसून को देखते हुए खेततलाई का निर्माण पहले ही करवा लिया गया।  इस संबंध में निदेशालय से अनुदान राशि नहीं देने के आदेश हैं।

मोहनलाल भटेश्वर, उप निदेशक, कृषि विस्तार, सवाईमाधोपुर

सरकार ने मना किया

&राज्य सरकार ने भुगतान नहीं करने के आदेश दिए थे।

आरडी सिंह, संयुक्त सचिव (जल उपयोग) कृषि निदेशालय जयपुर

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