इनकी चौखट पर आते ही बहने लगता है आंसुओं का दरिया, क्या है माजरा जिसकी खातिर दादी ने छोड़ दिया खाना-पीना

dinesh rathore

Publish: May, 19 2017 12:22:00 (IST)

Sikar, Rajasthan, India
इनकी चौखट पर आते ही बहने लगता है आंसुओं का दरिया, क्या है माजरा जिसकी खातिर दादी ने छोड़ दिया खाना-पीना

चौखट पर कदमों की हल्की सी आहट पर भी वो बेताब हो उठती है। पर, अनजान आवाज सुनकर वह खामोश हो जाती है। आंखों से बहता आंसू पास खड़े लोगों को भी रुला देता है।

चौखट पर कदमों की हल्की सी आहट पर भी वो बेताब हो उठती है। पर, अनजान आवाज सुनकर वह खामोश हो जाती है। आंखों से बहता आंसू पास खड़े लोगों को भी रुला देता है। यह दर्द है मोहल्ला कारीगरान में रहने वाली बुजुर्ग महिला राबिया की। इनका पोता पिछले छह दिन से लापता है। परिजनों ने बताया कि पिछले छह दिन से राबिया का रो-रो के बुरा हाल है। पोते की चाह में उसने खाना-पीना तक छोड़ रखा है। वार्ड संख्या 45 के निवासी रसीद ने बताया कि उसका छोटा भाई जमील मोहल्ला कारीगरान निवासी है। फिलहाल, वह विदेश में रहता है। उसका इकलौता बेटा साजिद करीब 19 साल का है। वह अपनी दादी राबिया के साथ ही रहता था। 10 मई को वह खाना खाकर घर पर सो गया था। इसके बाद वह घर से कब निकला। किसी ने उसे नहीं देखा और ना ही वह किसी को बताकर गया। रात को भी वह घर नहीं पहुंचा तो आसपास उसकी तलाश की गई। सुबह होने पर रिश्तेदारों व जान-पहचान के लोगों से साजिद के बारे में पता किया गया। लेकिन, वह कहीं नहीं मिला। साजिद को घर से निकले छह दिन हो गए हैं। लेकिन, उसकी कोई खैर खबर नहीं है। इधर, साजिद की दादी देख नहीं पाती हैं। पोते के इंतजार में भूखी प्यासी वह भी बीमार होती जा रही है। साजिद की मां का इंतकाल हो जाने के बाद वह अपनी बूढ़ी दादी के पास ही रहता था। साजिद की एक बहन अपनी बुआ के पास रहती है।






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कम पढ़ा लिखा है साजिद


साजिद के ताऊ रसीद के अनुसार वह कम पढ़ा लिखा है और कभी-कभी मजदूरी करता था। साजिद के नहीं लौटने पर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई गई है। लेकिन, उसके नहीं आने तक दादी राबिया को संभालना मुश्किल होता जा रहा है।

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